Friday, August 17, 2018

आस्था : घने जंगल में बसे बछराज कुंवर धाम की महिमा…

अम्बिकापुर प्रातापपुर से "राजेश गर्ग"   प्रतापपुर से लगभग 40 किलो मीटर की दूरी पर बलरामपुर-रमानुंजगंज जिले के वाड्रफनगर जनपद के अंतर्गत सघन वनों के बीच...

रुद्राभिषेक क्यों है इतना प्रभावी और महत्वपूर्ण….

भगवान शिव अनादि व अनन्त हैं अर्थात न तो कोई भगवान शिव के प्रारंभ के बारे में जानता है और न ही कोई अंत...

यहां तोते की मजार में करते है सजदा…

  अम्बिकापुर देश दीपक "सचिन" समाजिक भाईचारे की ऐताहासिक पृष्ठभूमि वाला सद्भावना ग्राम है तकिया विश्व की एकलौती तोते की मजार है मुख्य आकर्षण का केन्द्र...

देखिये गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान के 12 अदभुद नज़ारे…

बरिश में लुभा रही गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान की वादियां गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान के 12 अदभुद स्थानों का रहता है बारिश में अलग ही नजारा    कोरिया सोनहत...

गज केशरी शनि शक्ति धाम में मनाई गई शनि जयंती

दुर्ग  शहर के ''गज केशरी शनि शक्ति धाम'' मंदिर में शनि जयंती के अवसर पर श्रद्धालुओं का ताँता लगा रहा,,इस अवसर में सुबह से ही...

सर्व धर्म एकता का प्रतीक है बाबा भोलनशाह की मजार…

बाबा भोलनशाह के मजार पर सभी धर्म के लोगों ने चढाई चादर कोरिया सालाना उर्स के मौके पर सोनहत में सभी धर्म लोगों के लोगों ने...

यहां मां पार्वती ने खोजा था ‘नमः शिवाय’ का अर्थ

दक्षिण भारत में कपालेश्वर मंदिर मायलापुर चैन्नई तमिलनाड़ु में स्थित है। भगवान शिव का यह मंदिर 1250 ईसवी में बनाया गया। महाशिवरात्रि पर यहां...

सुमेरिया सभ्यता में देवी-देवताओं का स्थान

सुमेरिया सभ्यता का उदय और संपूर्ण विकास 'दजला-फरात' नदियों की घाटी में हुआ था। प्रचीन काल में इसे मेसोपोटामिया कहा जाता है, जो आज...

श्रीगणेश के ऐसे 8 मंदिर, जहां खुद प्रकट हुई थीं मूर्तियां

महाराष्ट्र में भगवान गणेश के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जिनमें गणेशजी के अष्टविनायक मंदिर भी शामिल हैं। गणपति उपासना के लिए महाराष्ट्र के अष्टविनायक...

मकर संक्रांति पर यहां आते हैं भगवान अय्यप्पा

केरल के सबरीमाला मंदिर में मकर संक्रांति के तीसरे दिन भगवान अय्यप्पा की शोभायात्रा पहुंचती है। इस दिन भगवान अय्यपा के दर्शन करने से...
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