Thursday , January 18 2018
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तीर्थ स्थल

तीर्थ स्थल ,आध्यात्म की खबरें

यहां तोते की मजार में करते है सजदा…

  अम्बिकापुर देश दीपक “सचिन” समाजिक भाईचारे की ऐताहासिक पृष्ठभूमि वाला सद्भावना ग्राम है तकिया विश्व की एकलौती तोते की मजार है मुख्य आकर्षण का केन्द्र    सरगुजा संभाग मुख्यालय अम्बिकापुर के तकिया गांव मे स्थित दरगाह जिले के धार्मिक आस्था के साथ कौमी एकता का सबसे बडा केन्द्र है। इस दरगाह में बनी तीन मजार मे से एक मजार …

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देखिये गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान के 12 अदभुद नज़ारे…

बरिश में लुभा रही गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान की वादियां गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान के 12 अदभुद स्थानों का रहता है बारिश में अलग ही नजारा    कोरिया सोनहत से “राजन पाण्डेय” विकासखंड सोनहत मुख्यालय से 80 किलोमीटर दूर गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में स्थित नीलकंठ ग्राम जो चारों ओर से पहाडि़यों की बीच बसा है यहां की ऊंची ऊंची पहाडि़यां अपने …

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गज केशरी शनि शक्ति धाम में मनाई गई शनि जयंती

दुर्ग  शहर के ”गज केशरी शनि शक्ति धाम” मंदिर में शनि जयंती के अवसर पर श्रद्धालुओं का ताँता लगा रहा,,इस अवसर में सुबह से ही पूजा पाठ प्रसाद  वितरण व भंडारे का भी आयोजन किया गया,,ऐसी मान्यता है की गज केशरी शनि देव के मंदिर में लोगो की मुरादे पूरी होती है यही कारण है की यह शनि देव का …

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सर्व धर्म एकता का प्रतीक है बाबा भोलनशाह की मजार…

बाबा भोलनशाह के मजार पर सभी धर्म के लोगों ने चढाई चादर कोरिया सालाना उर्स के मौके पर सोनहत में सभी धर्म लोगों के लोगों ने अपनी अपनी चादर बाबा भोलनशाह को चढ़ाया । सर्व प्रथम सोनहत विकासखंड एवं जिले के अलग अलग क्षेत्रों से आए श्रद्वालुओं ने श्यामाधार यादव की चादर को बाजे गाजे के साथ सर्व धर्म के …

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यहां मां पार्वती ने खोजा था ‘नमः शिवाय’ का अर्थ

दक्षिण भारत में कपालेश्वर मंदिर मायलापुर चैन्नई तमिलनाड़ु में स्थित है। भगवान शिव का यह मंदिर 1250 ईसवी में बनाया गया। महाशिवरात्रि पर यहां भक्त बड़ी संख्या में भगवान के दर्शन करने आते हैं। यह काफी पुराना मंदिर है। मूल कपालेश्वर मंदिर समुद्र की अनंत गहराईयों में समा चुका था। बाद में यह मंदिर पुनः बनवाया गया। जिस तरह कार्तिकेय …

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सुमेरिया सभ्यता में देवी-देवताओं का स्थान

सुमेरिया सभ्यता का उदय और संपूर्ण विकास ‘दजला-फरात’ नदियों की घाटी में हुआ था। प्रचीन काल में इसे मेसोपोटामिया कहा जाता है, जो आज का ‘आधुनिक ईराक’ है। हालांकि सुमेरिया के लोग धर्म को एक सुव्यवस्थित और गहन अध्यात्मिक आधार पर कायम न हो सके। सुमेरियाई लोग मंदिरों को ऊंचे स्थानों पर बनाते थे। मंदिर धार्मिक कार्यों के अलावा सामाजिक …

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श्रीगणेश के ऐसे 8 मंदिर, जहां खुद प्रकट हुई थीं मूर्तियां

महाराष्ट्र में भगवान गणेश के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जिनमें गणेशजी के अष्टविनायक मंदिर भी शामिल हैं। गणपति उपासना के लिए महाराष्ट्र के अष्टविनायक का विशेष महत्व माना जाता है। इन मंदिरों के संबंध में मान्याता है कि यहां विराजित गणेश प्रतिमाएं खुद प्रकट हुई हैं। 1. श्री मयूरेश्वर मंदिर गणपतिजी का यह मंदिर पुणे से 80 किलोमीटर दूरी पर …

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मकर संक्रांति पर यहां आते हैं भगवान अय्यप्पा

केरल के सबरीमाला मंदिर में मकर संक्रांति के तीसरे दिन भगवान अय्यप्पा की शोभायात्रा पहुंचती है। इस दिन भगवान अय्यपा के दर्शन करने से विशेष फल प्राप्त होता है। दरअसल यहां मंदिर में एक मकर ज्योति प्रज्वलित रहती है। इसी ज्योति के दर्शन के लिए करोड़ों भक्त अय्यप्पा स्वामी के दर्शन को आते हैं। भगवान अय्यप्पा के मंदिर में मकर …

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मकर संक्रांति की पहली डुबकी

इलाहाबाद मकर संक्रांति की पहली डुबकी के साथ संगम की रेती पर माघ मेले की शुरुआत होगी। आमतौर पर माघ मेले के छह प्रमुख स्नानपर्वों में से पौष पूर्णिमा से ही मेले की शुरुआत होती थी। अबकी मकर संक्रांति पर ही पहली डुबकी लगेगी और इसी के साथ प्रशासन की तैयारियों की परीक्षा होगी। अपनी अपनी परंपरा और तिथि के …

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साल के पहले दिन तिरुपति में तीन करोड़ का चढ़ावा

तिरुपति आंध्रप्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर में नए साल पर 80 हजार से अधिक भक्तों ने भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन किए। साल के पहले ही दिन शुक्रवार को मंदिर में करीब तीन करोड़ रुपए की नकदी चढ़ाई गई। यह सोने-चांदी के गहनों के अलावा है। इसी तरह शिर्डी के साईं मंदिर में भक्तों ने 24 से 27 दिसंबर के बीच …

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