नेता जी की बनाई पुलिया क्या बही, पूरा विभाग मेहरबान…….जांच के बाद भी कोई कारवाही नही

अम्बिकापुर 

  • आरटीआई कार्यकर्ता दिनेश सोनी के दस्तावेजी शिकायतो पर हुई जांच
  • नियम के मुताबिक कोई भी जनप्रतिनिधी अपने नाम पर नही कर सकता है ठेकेदारी
  • मौजूदा जिला पंचायत उपाध्यक्ष और तात्कालिक जिला पंचायत सदस्य थे ठेकेदार
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जैक लगाकर क्षतिग्रस्त पुलिया की मरम्मत..

सरगुजा जिला पंचायत उपाध्यक्ष ओम प्रकाश जायसवाल की ठेकेदारी मे बही पुलिया के मामले की जांच पुरी हो गई है। मामला मे जिला पंचायत की तीन सदस्यीय टीम ने जांच रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियो को सौंप भी दी है। लेकिन अब भी  ओहदेदार पद पर बैठे नेता जी के खिलाफ कोई कारवाही नही की जा रही है। लिहाजा शिकायतकर्ता ने मामले की शिकायत एक बार जांच रिपोर्ट के आधार पर सरगुजा कमीश्नर से की है। मामला मौजूदा बलरामपुर जिले के महेशपुर दोमुहना नाला की है, जिसमे सरगुजा विकास प्राधिकरण की राशि के माध्यम से सन् 2008 मे 19 लाख लागत की एक पुलिया का निर्माण किया गया था, लेकिन उसके बाद आई बरसात मे 2010 मे ही नवनिर्मित पुलिया  बारिश की भेंट चढ गई। और उस वक्त मामले को ढांकने के लिए के मौजदा जिला पंचायत सदस्य और काम के ठेकेदार श्री जायसवाल ने काफी जद्दोजहद की। और मामले को ढांकने अधिकारियो ने भी उनकी मदद की । और बहे हुए काम की मरम्मत कराने के लिए नई तरकीब निकाल ली..

 

इस तरकीब के तहत अधिकारियो ने पुलिया मे टो वाल और रिटर्निगं वाँल के लिए फिर से 19 लाख रुपए का काम स्वीकृत कर दिया। चूंकि पुलिया एक वजनदार जनप्रतिनिधी की ठेकेदारी मे बही थी, तो फिर भला कौन बोलने वाला था, और इसी नीयत से 19 लाख रुपए के टोवाल और रिटर्निंग वाल का उपयोग क्षतिग्रस्त पुलिस को फिर से अपने पैरो पर खडा करने के लिए कर लिया गया। और पूरी राशि को ढक के तीन पात कर दिया गया। और एक ही काम के लिए दो बार स्वीकृत राशि का एक बडा हिस्सा ठेकेदार और अधिकारियो ने मिल कर हजम कर लिया। और ये सब सामने आया जांच रिपोर्ट मे..

 

क्या आया जांच रिपोर्ट मे आप खुद देखे……….DSC_1682DSC_1683

 

इस जांच रिपोर्ट को पढ कर आप ने ये खुद ही अंदाजा लग लगा लिया होगा कि केन्द्र सरकार द्वारा दो बार सर्वश्रेष्ठ जिला पंचायत का तमगा प्राप्त सरगुजा जिला पंतायत मे आखिर ये क्या हो रहा है। और जब यंहा के ओहदेदार जनप्रतिनिधी ही ठेकेदारी करेगे , तब तो अधिकारियो का ना ही कोई दबाव होगा ना कोई अंकुश। और परिणाम को आपके सामने है।

 

जनप्रतिनिधी नही कर सकता है ठेकेदारी 

जानकारी के मुताबिक कोई भी जनप्रतिनिधी अपने ठेकेदारी का लाईसेंस बनवाकर कोई भी निर्माण या ठेकेदारी का काम नही कर सकता है। लेकिन इस पूरे मामले मे एक और गैरकानूनी हरकत सामने आई है, दरअसल इस क्षतिग्रस्त पुलिया के एवज मे दो बार अगल अगल मद से राशि निकाल कर काम करने वाला कोई साधारण ठेकेदार नही , बल्कि जिला पंचायत के उपाध्यक्ष ओम प्रकाश जायसवाल है। जो नियम के मुताबिक जनप्रतिनिधि रहते हुए ठेकेदारी का काम नही कर सकते है, लेकिन श्री ओम प्रकाश जायसवाल ने जिला पंचायत उपाध्यक्ष रहते हुए भी उस अपने नाम से ठेकेदारी का लाईसेंस बनवा रखा था। जो नियमो के विपरीत है। लिहाजा आरटीआई कार्यकर्ता इस मामले की शिकायत भी शासन और प्रशासन से करने की तैयारी मे है। लेकिन उनको पहले की ही तरह इस बार भी कारवाही की उम्मीद कम है।

कैसे सामने आया मामला…… 

दरअसल कार्य की निर्माण ऐजेंसी लोक निर्माण विभाग और जनप्रतिनिधी ठेकेदार ओम प्रकाश जायसवाल की मिलीभगत का ये मामला पूरी तरह से दफन हो गया था, लेकिन जिले के चर्चित आरटीआई कार्यकर्ता दिनेश कुमार सोनी को इस मामले की भनक बलरामपुर जिले के दौरे के दौरान कुछ महीने पहले तब लगी, जब ये पता चला कि 19 लाख के एक काम के लिए 38 लाख से अधिक की राशि का बंदरबाट हो गया है। और इस बंदरबाट मे कई लोग शामिल है। लिहाजा इस जानकारी के बाद आरटीआई कार्यकर्ता श्री सोनी ने मामले की जानकारी जिला पंचायत से ली। और मामले की जानकारी लेकर इसकी शिकायत जिला पंचायत सीईओ को दी,, लेकिन जानकर हैरानी होगी, कि इस शिकायत और जांच रिपोर्ट आने मे उतना वक्त लग गया , जितने मे दो तीन पुलिस बन कर तैयार हो जाती, हांलाकि आरटीआई कार्यकर्ता के तमाम कोशिशो के बाद आखिरकार जिला पंचायत ने मामले की जांच कराई। और जिला पंचायत द्वारा कराई गई इस जांच कमेटी मे ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग के ईई और जिला पंतायत के दो तकनीकी समन्यवयको ने की।

जांच अब पूरी हो चुकी है ,और जांच सार्वजनिक भी हो गई है, लेकिन कारवाही के नाम पर अब तक ना ही ठेकेदार और ना ही अधिकारी किसी पर कोई कारवाही नही की गई है। लिहाजा आरटीआई कार्यकर्ता ने जांच प्रतिवेदन के साथ मामले की शिकायत सरगुजा के संभाग आयुक्त, राज्य शासन और कलेक्टर से कर दी है। लेकिन देखना है कि सत्ताधारी दल के एक वजनदार नेता और वर्तमान मे जिला पंचायत सरगुजा के उपाध्यक्ष द्वारा पीडब्लूडी के अधिकारी से सांटगांठ कर शासकीय राशि के गबन या दुरुपयोग के इस मामले मे क्या कारवाही होती है।

खैर इस मामले के सच्चाई जानकर आपको हैरानी होगी, कि 2010 के इस मामले की ज