दुर्ग जिले का सबसे बड़ा अवार्ड: बीमा कंपनी को देना होगा 93 लाख क्लेम राशि

दुर्ग

“हितेश शर्मा”

मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण का सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शंघपुष्पा भतपहरी ने बीमा कंपनी को 92 लाख 72 हजार 350 रुपए देने का आदेश दिया है। यह राशि दोषी वाहन चालक और ओलिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को देना होगी। अवार्ड राशि में 71 लाख 71 हजार 250 रुपए क्लेम का है। वहीं 21 लाख 11 सौ रुपए ब्याज का है। इस प्रकरण में परिवाद दिवंगत आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. शैलेष वर्मा की पत्नी डॉ. विभा वर्मा व उनके आश्रित पुत्र ने लगाया था।

वर्ष 2011 में परिवाद प्रस्तुत
सड़क दुर्घटना में डॉ. शैलेष वर्मा की मृत्यु होने के बाद परिवादी डॉ. ने यह कहते हुए न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया था कि डॉ. शैलेष की मृत्यु के बाद उनका परिवार टूट गया है। दुर्घटना के बाद प्रकरण कांकेर में थाना में दोषी वाहन महेन्द्रा बस ट्रेवल्स के चालक के खिलाफ अपराध दर्ज भी है। परिवादी ने न्यायालय से क्लेम राशि दिलाने की मांग करते हुए वर्ष 2011 में परिवाद प्रस्तुत किया था। पांच वर्ष तक चली सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने इस मामले में फैसला सुनाया।

यह है मामला
जिले के आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. शैलेष अपनी पत्नी विभा व अन्य रिश्तेदार के साथ कार से जगदलपुर जा रहे थे। एक फरवरी 2011 की सुबह लगभग सवा आठ बजे विपरित दिशा से आ रही महेन्द्रा ट्रेवल्स की बस क्रं माक सीजी 04 ई0993 के चालक लापरवाही पूर्वक वाहन चलाते हुए कार को ठोकर मार दी थी। इस दुर्घटना में कार चला रहे डॉ. की घटना स्थल पर ही मृत्यु हो गई थी।

अब तक सबसे बड़ी राशि
बीमा दुर्घटना दावा प्रकरण में दुर्ग जिला न्यायाय में इतनी बड़ी राशि अब तक अवार्ड नहीं किया था। तीन वर्ष पहले बालोद मार्ग में हुई सड़क दुर्घटना मेें न्यायालय ने 48 लाख रुपए क्लेम राशि देने का आदेश दिया था। इसके बाद 32 लाख रुपए का मय ब्याज अवार्ड किया गया था।

दिवंगत आयकर दाता थे
परिवादी के अधिवक्ता अभिषेक वैष्णव ने कहा कि न्यायालय से पारिवारिक पृष्ठभूमि का हवाला देकर क्लेम राशि पारित करने का निवेदन किया था। साथ ही क्लेम राशि अधिक से अधिक पारित करने का कारण बताया कि दिवंगत आयकर दाता थे। वे समय पर अपने आयकर जमा करते थे। इस बात को न्यायालय ने बल दिया और आदेश पारित किया।

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