जांजगीर चांपा। जिले में पेट्रोल-डीजल की कमी को पंप मालिक मौके का फायदा उठा कर मुनाफाखोरी कर रहे हैं। हालात यह हैं कि देर रात पेट्रोल-डीजल 15 से 20 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त दाम पर बेचा जा रहा है। मजबूर उपभोक्ता—किसान, मजदूर, एंबुलेंस चालक और छोटे व्यापारी—जेब कटवाने को विवश हैं, जबकि जिम्मेदार अफसर आंख मूंदे बैठे हैं।
खाड़ी देशों के बीच चल रहे युद्ध का असर बताकर तेल की आपूर्ति में कटौती का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन कमी से ज़्यादा कालाबाजारी साफ दिख रही है। पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें, रात में चोरी-छिपे बिक्री और दिन में स्टॉक खत्म का बोर्ड—यह सब सुनियोजित तरीके से मुनाफाखोरी की जा रही हैं।
खेती-किसानी पर सीधा असर…
डीजल महंगा होते ही सिंचाई, ट्रैक्टर और परिवहन की लागत बढ़ गई है। फसल कटाई से लेकर फसल ढुलाई तक किसान बेहाल हैं। ग्रामीण इलाकों में हालात और खराब—जहां वैकल्पिक साधन नहीं, वहां लूट खुलकर चल रही है।
प्रशासन की निष्क्रियता सवालों के घेरे में…
कालाबाजारी रोकने के लिए न तो प्रभावी जांच, न औचक निरीक्षण, न ही सख्त कार्रवाई। शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन दबाव में है या मिलीभगत में शामिल हैं। लोग जिला प्रशासन से सवाल पूछ रहे है।
जनता का आक्रोश…
जनता ऐसे लोगों पर तत्काल कार्रवाई, स्टॉक की पारदर्शी निगरानी, रात की अवैध बिक्री पर कड़ी रोक और दंडात्मक कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
अगर अब भी सख्ती नहीं हुई, तो यह संकट आर्थिक बोझ से आक्रोश में बदल सकता है।
