बलरामपुर..(कृष्णमोहन कुमार)..जिले के प्रभारी डीईओ एमआर यादव द्वारा किये गये 4 करोड़ 53 लाख 19 हजार 992 रुपए के घोटाले के मामले में जांच टीम ने जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दिया है..विश्वस्त सूत्रों की माने तो जांच टीम ने प्रभारी डीईओ पर लगे करोड़ो रुपए के गबन के आरोप को सही पाया है..और दंडात्मक कार्यवाही करने की अनुशंसा की है..
दरअसल जिले के प्रभारी डीईओ एमआर यादव पर 4 करोड़ से अधिक की रकम विभिन्न कार्यों के लिये जिला कोषालय से आहरित की थी..जिसमें मुख्य रूप से स्वच्छता सामग्री,खेल सामग्री,फर्नीचर की खरीदी शामिल थी..जांच टीम ने शिक्षा विभाग तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान लिये थे..और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने प्रभारी जिला डीईओ को तलब किया था..लेकिन सूत्रों का कहना है की प्रभारी डीईओ ने जांच टीम को सहयोग करने के बजाय टालमटोल की रणनीति अपनाई..इसके साथ ही खरीदे गये सामग्रियों का भौतिक सत्यापन करने पहुंची टीम पर गिरोह बनाकर अनावश्यक दबाव बनाने का आरोप भी मड़ दिया था..
विश्वस्त सूत्र बताते है की प्रभारी डीईओ ने नियमानुसार किसी भी सामग्री का क्रय नही किया..और आरोप तो यह है की उन्होंने विभागीय अकाउंटेट को सामग्रियों का बिल देकर कैश मेमो बनाकर कोषालय से आहरण करने के लिये निर्देशित किया था..सूत्र तो यह भी बताते है की शिक्षा विभाग का कैश बुक दफ्तर से नहीं अन्यत्र स्थान से जांच टीम ने बरामद किया था..इसके अलावा जांच टीम ने प्रभारी डीईओ को बयान के लिये कई बार पत्र लिखे ..लेकिन प्रभारी डीईओ जांच टीम के समक्ष उपस्थित ही नहीं हुये..
सुनने में तो यह भी आया है की प्रभारी डीईओ ने अपने आसपास के आभा मंडल में ऐसा माहौल पैदा कर दिया..की विभागीय लोग उन्हें विभागीय मंत्री गजेंद्र यादव का रिश्तेदार समझ बैठे..जिसके बाद उनके आभा मंडल में कुछ कर्मचारी इस कदर नतमस्तक हुये की..चापलूसी की सारी हदे पार होती चली गई..प्रभारी डीईओ के मौखिक निर्देश पर विभाग का कामकाज चलते आ रहा है..और विभाग के अधिकारी – कर्मचारी अब इस मुगालते का शिकार हो गये है..की प्रभारी डीईओ एमआर यादव के सीआर पर लाल लकीर कोई खींच ही नहीं सकता..
सूत्रों की माने तो जिस तादाद में स्वच्छता से संबंधित सामग्री खरीदी गई..उतनी तादाद तो कोरोना के संक्रमण काल में शायद ना खरीदी गई हो..और जितनी भी सामग्री खरीदी गई वे धरातल से नदारद और सरकारी फाइलों में नजर आ रही है!.विभाग ने अगर सामग्री खरीदी थी..तो वह जांच टीम के हाथ क्यों नहीं लगी..मामूली सा हैंडवॉश भी जिले के सरकारी स्कूलों में नहीं दिखा..विभागीय सूत्रों की माने तो प्रभारी डीईओ ने पदस्थ होते ही एक क्षत्र राज कायम कर दिया.. हालात तो यह है की जिन शाखाओं के प्रभारी बाबू है..उन्हें पता ही नहीं चली और नोटशीट आगे बढ़ गई..रातों रात ऐसा खेला हुआ की..नियम तार – तार कर दिये गये!.
बहरहाल अब जांच रिपोर्ट कलेक्टर तक पहुंच चुकी है..और जांच टीम ने अपनी प्रतिक्रिया भी दे दी है..ऐसे में अब देखने वाली बात है..की राज्य सरकार को कब तक रिपोर्ट भेजी जाएगी..और इस पूरे 4करोड़ के फर्जीवाड़े में क्या कार्यवाही होती है?.
