बलरामपुर। जिले का एक विभाग इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है.. वजह आपसी खींचतान है। साहब को गांधी जी से प्रेम है। कर्मचारी दबी जुबान से अपने अधिकारी के कारगुजारियों की तारीफ करते थकते भी नहीं है.. खैर यह तो कुछ भी नहीं है। खींचतान की असल वजह आपसी सामंजस्य है। दो साहबों के बीच तालमेल पटरी पर नही बैठ पा रही है। दूसरे नंबर के साहब अलर्ट मोड पर रहते है, जबकि पहले नंबर वाले साहब के स्वभाव की तासीर दूजे किस्म की है.. स्वाभाविक है सामंजस्य स्थापित ना हो पाएगा।
हाल फिलहाल की बात है कम्पीटिशन एग्जाम में क्वालीफाई करने वाले होनहार छात्रों को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सम्मानित करने वाले थे। जिसमें एक छात्र बलरामपुर जिले से भी था.. और छात्र को राजधानी ले जाने का जिम्मा जिले के आलाधिकारी ने विभाग के ही दूसरे नंबर के साहब को दिया था। छात्र राजधानी भी पहुंचा और सम्मानित होकर वापस लौट भी आया। बकायदा फोटो सेशन भी हुआ। अब यह बात दूसरे अधिकारी को खल गई।
विश्वस्त सूत्र बताते है पहले से चली आ रही दोनों साहबों के बीच की दूरियां व तकरार की आग को फिर हवा मिल गई.. और दोनों में इस बार ठन गई। ऐसे में सोचने वाली बात है कि जब दोनों साहब आपस में ही उलझे रहे तो विभाग का क्या होगा? मातहत कर्मचारी तो घुटते-पीसते रह जाएंगे.. और जिस गुड गवर्नेंस का नारा सुशासन की सरकार ने दे रखा है भला उसका क्या होगा?
पर गांधी जी से प्रेम करने वाले पहले नम्बर के साहब को समझना चाहिए कि एकला चलो से विभाग नहीं चलेगा। गांधी प्रेम भी मोह माया का ही हिस्सा है। जांच पर जांच, की आंच अगर आयी तो रिटायरमेंट खराब वाला सिस्टम है। व्यवस्था डगमगा गई है। जिसे पटरी पर लाना भी जरूरी है। ऊपर से भारी भरकम विभाग है। शायद मिल बांट कर काम करने से कोई सार्थक परिणाम आये इस विचार करना चाहिए।
