अमृतसर। पंजाब के अमृतसर में शनिवार शाम हुई एक सनसनीखेज वारदात ने पूरे पंजाबी मनोरंजन जगत और डिजिटल क्रिएटर समुदाय को स्तब्ध कर दिया है। शहर के व्यस्त लोहारका रोड इलाके में मशहूर मेकअप आर्टिस्ट, स्टाइलिस्ट और प्रमुख LGBTQ इन्फ्लुएंसर ‘मैड संधू’ (असली नाम मधुसूदन) की मोटरसाइकिल सवार दो अज्ञात हमलावरों ने दिनदहाड़े गोलियां बरसाकर हत्या कर दी। घटना शाम करीब 6 बजे उस वक्त घटी जब संधू अपनी कार धुलवाने के लिए जा रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के अनुसार, घात लगाकर बैठे बाइक सवार शूटरों ने संधू पर कई राउंड फायरिंग की, जिसमें दो गोलियां सीधे उन्हें लगीं। वारदात को अंजाम देकर हमलावर तुरंत मौके से फरार हो गए, जबकि लहूलुहान हालत में सड़क पर गिरे संधू को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुँचा और पूरे इलाके को सील कर जांच शुरू कर दी। डीएसपी प्रभजोत सिंह विर्क ने बताया कि घटनास्थल से दो खाली खोखे बरामद किए गए हैं और अज्ञात हमलावरों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं, जिन्हें शुरुआती जांच में कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए शूटरों के भागने के रूट को ट्रेस किया जा रहा है।
इस बीच वारदात के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर ब्रिटेन में मौजूद गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों के नाम से कथित तौर पर एक पोस्ट साझा की गई, जिसमें संधू की हत्या की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया। इस पोस्ट में संधू पर नई पीढ़ी को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए अन्य लोगों को भी धमकियाँ दी गई हैं। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस वायरल पोस्ट की सत्यता की फोरेंसिक और साइबर स्तर पर पुष्टि की जा रही है और फिलहाल आधिकारिक तौर पर किसी गैंग की संलिप्तता की पुष्टि नहीं हुई है।
मूल रूप से फैशन और सिनेमा जगत में सक्रिय रहे मधुसूदन उर्फ मैड संधू ने अपने करियर की शुरुआत मुंबई और पंजाब में फिल्मों के लिए स्टाइलिस्ट व सहायक कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर के रूप में की थी। बाद में एक मुखर डिजिटल क्रिएटर के तौर पर पहचान बनाने वाले संधू सोशल मीडिया पर लैंगिक पहचान (जेंडर आइडेंटिटी), मेकअप और फैशन पर खुलकर अपनी राय रखते थे। लगातार होने वाली होमोफोबिक ट्रोलिंग के बावजूद वे अपनी पहचान को लेकर बेहद मुखर रहे, जिसके चलते लाखों युवा उन्हें फॉलो करते थे। उनकी इस नृशंस हत्या ने पंजाब में कानून-व्यवस्था के साथ-साथ अभिव्यक्ति की आजादी और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
