अम्बिकापुर/पारसनाथ सिंह। छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर में मेला के लिए कलाकेंद्र मैदान आवंटन को लेकर उपजा कथित ‘वसूली ऑडियो कांड’ अब एक बड़े सियासी बवंडर में तब्दील हो चुका है। लाखों रुपये के लेन-देन की कशिश समेटे इस वायरल ऑडियो ने सरगुजा की राजनीति में ऐसा भूचाल ला दिया है, जिसकी तपिश अब सत्ताधारी दल के गलियारों तक पहुंच रही है। दावा किया जा रहा है कि इस आटोमेटेड से लगने वाले संदेहास्पद ऑडियो में भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया और नगर निगम की महापौर मंजूषा भगत की आवाजें हैं। हालांकि, महापौर ने बीते 22 जून को ही इसे ‘एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) जनित’ यानी फर्जी बताते हुए आजाक थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन हैरत की बात यह है कि इतने दिन बीत जाने के बाद भी न तो इस पर कोई एफआईआर हुई और न ही किसी प्रभावी जांच की शुरुआत। सत्तापक्ष की इस रहस्यमयी सुस्ती ने अब विपक्ष को आक्रामक होने का खुला मौका दे दिया है।
गुरुवार को जिला कांग्रेस कार्यालय ‘राजीव भवन’ में बुलाई गई एक तगड़ी प्रेसवार्ता में सरगुजा जिला कांग्रेस कमेटी ने सरकार और पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक और निगम में नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने दो टूक कहा कि उन्होंने कलेक्टर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को इस पूरे घालमेल की निष्पक्ष जांच के लिए ‘एसआईटी’ (विशेष जांच दल) गठित करने का ज्ञापन सौंपा था, मगर नतीजा ढाक के तीन पात रहा। गंभीर मामलों में पुलिस का यह ढीला और टालमटोल वाला रवैया कई बड़े सवाल खड़े करता है। कांग्रेस ने इस दौरान कानून के दोहरे मापदंडों पर भी प्रहार किया और याद दिलाया कि कैसे सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो पर नायब तहसीलदार से मारपीट का संगीन मामला दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने उन्हें खुला छोड़ रखा है। विधायक सरेआम घूम रहे हैं, सरकारी कार्यक्रमों में मंच साझा कर रहे हैं, लेकिन खाकी के हाथ उन तक नहीं पहुंच पा रहे।
मामला सिर्फ ऑडियो कांड तक सीमित नहीं है, सरगुजा में रसूखदारों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि भिट्ठीकला गांव में एक बेबस विधवा महिला की जमीन हड़प ली गई। खुद कलेक्टर के सख्त निर्देश के बावजूद अब तक इस भूमि घोटाले के दोषियों पर एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है, जिससे साफ है कि परदे के पीछे से कोई प्रभावशाली हाथ इस पूरी कार्रवाई की कमान संभाल रहा है। इन तमाम मुद्दों को लेकर अब कांग्रेस आर-पार के मूड में आ चुकी है। नेताओं ने साफ चेतावनी दी है कि अगर इन तीनों मामलों में तत्काल निष्पक्ष कानूनी एक्शन नहीं हुआ, तो शांत दिखने वाला सरगुजा सड़कों पर उतरेगा। इसी कड़ी में आगामी 5 जुलाई को कांग्रेस एक विशाल ‘आक्रोश न्याय यात्रा’ निकालने जा रही है, जो सीधे आईजी सरगुजा रेंज के दफ्तर पहुंचेगी।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल खुद भाजपा की कार्यशैली पर खड़ा होता है। जब महापौर मंजूषा भगत खुद चिल्ला-चिल्लाकर कह रही हैं कि ऑडियो फर्जी है और उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है, तो फिर भाजपा संगठन और सरकार इस ऑडियो की दूध का दूध और पानी का पानी करने वाली जांच कराने से क्यों कतरा रहे हैं? अपनी ही पार्टी के बड़े नेताओं का नाम इस तरह उछलने के बाद तो भाजपा को सबसे पहले पुलिस पर दबाव बनाना चाहिए था ताकि सच सामने आए और उनका दामन साफ हो। लेकिन यहां गंगा उल्टी बह रही है; न्याय की गुहार पीड़ितों या आरोपियों को लगानी थी, मगर सड़कों पर कांग्रेस को उतरना पड़ रहा है। सत्ता में बैठी भाजपा की यह ‘रहस्यमयी खामोशी’ और जांच को लेकर दिख रही ‘शून्य हलचल’ जनता के बीच इस अंदेशे को हवा दे रही है कि कहीं इस धुआं उठने की वजह वाकई कोई छिपी हुई आग तो नहीं? सूबे में सरकार भी भाजपा की है, फिर भी जांच में यह लेत-लतीफी बताती है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।
