रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नकटी गांव में विधायक कॉलोनी निर्माण के लिए प्रशासन द्वारा की गई अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई अब छत्तीसगढ़ की राजनीति का नया केंद्र बन गई है। बेदखली की इस कार्रवाई में 80 से अधिक परिवारों के आशियाने टूटने के बाद जहां कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की है, वहीं राज्य सरकार ने इस पर बेहद कड़ा और आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस पूरे मामले को कांग्रेस का ‘पॉलिटिकल माइलेज’ लेने का जरिया बताते हुए विपक्ष पर चौतरफा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी सिर्फ घड़ियाली आंसू बहा रही है, जबकि हकीकत यह है कि इस पूरी योजना का अलॉटमेंट खुद कांग्रेसी शासनकाल के दौरान हुआ था।
स्वास्थ्य मंत्री ने कांग्रेस की इस सहानुभूति को ‘डबल स्टैंडर्ड’ करार देते हुए तंज कसा कि ‘सांप निकल गया है और अब डंडा पीटा जा रहा है।’ उन्होंने सवाल उठाया कि जब पिछले तीन महीनों से इस अलॉटमेंट और बेदखली की कानूनी प्रक्रिया चल रही थी, तब कांग्रेस के नेता और विधायक सामने क्यों नहीं आए? जब तक गरीबों के मकान टूटे नहीं थे, तब तक कांग्रेस को उनकी सुध क्यों नहीं आई? मंत्री जायसवाल ने विपक्षी विधायकों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर उन्हें जनता से इतनी ही सच्ची हमदर्दी है, तो उन्हें सामूहिक रूप से लिखित में देना चाहिए कि वे इस कॉलोनी में आवंटित जमीन को स्वीकार नहीं करेंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल जले पर नमक छिड़कने का काम कर रही है, जबकि सत्ता में रहते हुए उन्हें इन प्रभावित लोगों को पट्टा वितरित करना चाहिए था। प्रशासन की इस कार्रवाई और उसके बाद आए इस राजनीतिक बयान ने साफ कर दिया है कि नकटी गांव का यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमाने वाला है।
