जेलों में कड़ी सुरक्षा और बंदी कल्याण पर ध्यान दें

 

जेल मंत्री श्री गौर जेलों की समीक्षा बैठक में

भोपाल : गुरूवार, दिसम्बर 26, 2013, 16:08 IST
 

गृह एवं जेल मंत्री श्री बाबूलाल गौर ने निर्देश दिये हैं कि प्रदेश की जेलों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और बंदी कल्याण पर विशेष ध्यान दिया जाए। बंदियों द्वारा उत्पादित वस्तुओं से होने वाली आय का एक हिस्सा उनके कल्याण पर खर्च किया जाये। साथ ही जेल प्रहरियों को पुलिस विभाग के समान विशेष वेतन एवं अवकाश की सुविधाएँ प्राप्त हों।

श्री गौर आज जेल मुख्यालय में प्रदेश की जेलों की समीक्षा बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। बैठक में प्रमुख सचिव जेल श्री जे.टी. एक्का, जेल महानिदेशक श्री सुरेन्द्र सिंह सहित अन्य प्रमुख अधिकारी मौजूद थे।

श्री गौर ने जेल विभाग के अधिकारियों से कहा कि बंदी जेल से फरार नहीं हों, इसके लिये जेलों में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था रहे। जेल में बंदियों को स्वावलंबी बनाने की दिशा में भी कारगर प्रयास हों। जेलों में बंदियों द्वारा उत्पादित वस्तुओं से लगभग ढाई करोड़ की सालाना आय होती है। इस आय का एक हिस्सा बंदियों के कल्याण पर खर्च करने के संबंध में विभाग प्रस्ताव तैयार करे।

श्री गौर ने कहा कि जेलों में नियुक्त प्रहरियों द्वारा बिना अवकाश के की जा रही सुरक्षा ड्यूटी को ध्यान में रखते हुए जरूरी है कि जेल प्रहरियों को भी पुलिस विभाग के समान वर्ष में एक माह का विशेष वेतन और अवकाश प्राप्त हो। उन्होंने इस संबंध में महानिदेशक जेल को प्रस्ताव तैयार करने को कहा।

बैठक में जेलों के इन्फ्रास्ट्रक्चर, वर्तमान स्थिति, जरूरतों, सुविधाओं और कार्यक्रमों विशेषकर बंदियों के सामाजिक पुनर्वास, स्वावलंबन के लिये संचालित कार्यक्रमों के संबंध में जानकारी का पॉवर पाइंट प्रेजेंटेशन दिया गया। बताया गया कि प्रदेश की 11 केन्द्रीय, 29 जिला, 84 उप एवं एक खुली जेल में कुल 34 हजार 844 बंदी हैं। इनमें दंडित बंदियों का प्रतिशत 46 है जो देश के अन्य प्रदेशों से अधिक है। इसके साथ ही प्रदेश की जेलों में केवल 150 ऐसे अंडर ट्रायल बंदी है, जिनके प्रकरण तीन वर्ष से अधिक के हैं। यह स्थिति प्रकरणों के त्वरित निराकरण को दर्शाती है।