साईकलर बसंत की राह में बाधक बन रही गरीबी..प्रशासन से उम्मीदे…!

[highlight color=”black”]अम्बिकापुर [/highlight][highlight color=”red”]देश दीपक “सचिन” [/highlight]

 

सरगुजा जिले के छोटे से गाव कुन्नी में रहने वाले बसंत ने साइकलिंग के क्षेत्र में प्रदेश व देश में अपना नाम रोशन किया है,, दरअसल बसंत राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में सामान्य साइकल से दूसरा स्थान प्राप्त किया था गरीबी और सुविधाओं के आभाव में बसंत के पास रेसर साइकल नहीं थी,, लेकिन अपने जज्बे के बूते बसंत ने सामान्य साइकल से ही दूसरा स्थान प्राप्त किया था,,और अब लगातार साइकलिंग के अभ्यास में लगा रहता है,,

[highlight color=”orange”]पुरानी सामान्य साईकल से प्रदेश में पाया दूसरा स्थान [/highlight]

एक गरीब किसान का बेटा बसंत अपने जज्बे और मेहनत के बूते राज्य स्तरीय स्कूल साइकलिंग प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त कर चुका है, वो भी अपनी वही पुरानी आम तौर पर उपयोग की जाने वाली सामान्य साइकल में जबकि रेसर साइकिलो की बात ही कुछ और है, बहरहाल बसंत ने प्रतियोगिताये जीती और ईनाम की राशी इकट्ठा करना शुरू कर दी, जिसके बाद घर से कुछ पैसे मिलाकर बसंत ने एक पुरानी रेसर साइकल खरीद ली है,, और इसी पुरानी साइकल के सहारे बसंत साइकिलिंग की दुनिया की उचाईयों को छूने का ख्वाब देख रहा है, लेकिन बसंत के परिवार की मालीय हालत क्या बसंत की राह में बाधक नहीं बनेगी,,

[highlight color=”yellow”]एलीजा करती है बसंत को प्रैक्टिस में मदद [/highlight]

वही बसंत को उसकी मंजिल तक पहुचाने में बसंत की साथी एलीजा जो साइकिलिंग में सीनियर है और कई प्रतियोगिता जीत चुकी है, रोज सुबह बसंत जब प्रैक्टिस करता है तो एलीजा बसंत के साथ होती है, और बसंत को साइकिलिंग के विशेष तौर तरीके बताती है, हालाकी एलीजा भी जशपुर जिले के एक गरीब किसान परिवार से है लेकिन संभाग मुख्यालय में रह कर सुविधाओं का लाभ लेने व अच्छे खान पान के लिए एलीजा अम्बिकापुर की एक निजी क्लीनिक में प्राइवेट नौकरी भी करती है जिससे उसका गुजारा चल जाता है,,लेकिन साइकलिंग के लिए डेढ़ से दो लाख की साइकिल खरीदना एलीजा व बसंत दोनों के लिए सपना ही है,,

[highlight color=”orange”]पी टी आई. राजेश प्रताप सिंह से मिलती है प्रेरणा [/highlight]

बहरहाल एलीजा और बसंत दोनों ही अपनी सफलता का श्रेय पी टी आई. राजेश प्रताप सिंह को दे रही है इनका कहना है की राजेश सर के मार्गदर्शन में ही इन लोगो को प्रेरणा मिली है और विश्व में अपने प्रदेश का नाम रोशन करने की तय्यारी में जुट गए है वही साइकिलिंग के इस जूनून को हासिल कराने के लिए राजेश सिंह ने शासन की ओर से इन बच्चो को पूरी मदद दिलाने की बात कह रहे है,

गौरतलब है की सरगुजा की शान बसंत और एलीजा दोनों में ही प्रतिभा की कमी नही है इस बात को दोनों ने ही पूरे प्रदेश के सामने साबित किया है लेकिन उचित संसाधनों के आभाव में कही ये प्रतिभा हमेशा की तरह गाँव में ही ना दफ़न होकर रह जाए, अलबत्ता प्रदेश सरकार को इन प्रतिभाओं के जरिए देश में छत्तीसगढ़ का परचम फहराने के लिए सहयोग करे, वर्तमान स्थिति की बात करे तो इन साईकलरो को जरूरत है सिर्फ अच्छे संसाधनों की क्योकि कुछ कर दिखाने का जज्बा और कड़ी मेहनत बसंत और एलीजा दोनों ही कर रहे है,, और सरकार से सहयोग की मांग कर रहे है,,