श्रीमद् भागवत कथा से ओत-प्रोत हुआ केनाबांध

अम्बिकापुर 

भगवान के गुण व्यक्ति जीवन में करे ग्रहण

नगर के केनाबांध वार्ड क्रमांक 21 में आज श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ एवं एकादशी उद्यापन के चैथे दिवस बक्सर ब्रम्हपुर से पधारे पंडित शोभनाथ शास्त्री ने कथा पावन प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म उत्सव एवं नन्द उत्सव के बारे में बताया। कथा के दौरान धूम-धाम से कृष्ण का जन्म उत्सव एवं नन्द उत्सव मनाया गया। इसके पूर्व वामन भगवान की अलौकिक झांकी निकाली गई।

यह भागवत का ज्ञान यज्ञ अपने मातृ-पितृ एवं गुरू ऋण से मुक्ति हेतु पाठक परिवार की माता के द्वारा किया जा रहा है। इस भागवत ज्ञानयज्ञ कथा में वृन्दावन से पधारे पण्डित प्रमोद शास्त्री व डाॅ0 विजय शंकर पाण्डेय का भी सहयोग है। कल दूसरे दिन कथा के पावन प्रसंग के बारे में  शास्त्री के अनुसर भगवान कृष्ण की बाल लिलाओं का वर्णन होगा। जिसमें पूतना का उधार, गोवर्धन धारण एवं 56 भोग लगेगा।  शास्त्री के अनुसार व्यक्ति अपनी महत्वकांक्षाओं के कारण घमण्ड करता है। जिसका भगवान श्रीकृष्ण  के द्वारा इन्द्र का मानमर्दन गोवर्धन पर्वत धारण कर किया गया। ग्वाल वालों की रक्षा की गई। सुखदेव जी द्वारा यह भागवत की कथा राजा परीक्षित को मोक्ष के लिये सुनाई गई। इस कथा के पावन प्रसंग में उन दिशानिर्देशों का वर्णन किया गया है।

जिसमें अल्प जीवन में मनुष्य कैसे मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है और कम से कम समय में उसके क्या कर्तव्य होते हैं। उसे पूरा कर सकता है। यही मनुष्य के जीवन की सार्थकता है। ज्ञानयज्ञ के चैथे दिन व्यास पीठ से यह संदेश दिया गया कि भगवान के गुण को व्यक्ति अपने जीवन में धारण करके भगवन के समान बन सकता है। चूंकि आत्मा परम आत्मा का अंश है। श्रीमद् भागवन महापुराण कलयुग के आरंभ में श्री व्यास जी के द्वारा बताया हुआ बहुत ही मार्मिक ग्रन्थ है। इस घोर कलयुग में व्यक्ति अपने जीवन में कैसे सार्थक बना सकता है, इसका उन्होंने वर्णन किया। लोक कल्याण के लिये जब राजा परीक्षित की उम्र केवल सात दिन के लिये शेष रह गई थी, तो श्री सुखदेव जी ने मात्र 7 दिन के अन्दर ही व्यक्ति के क्या कर्तव्य है। वह इस ग्रन्थ के माध्यम से बताया था। केनाबांध में प्रमोद पाठक, योगेन्द्र पाठक, अजाय पाठक एवं धनन्जय पाठक के निवास में आयोजित इस भागवत कथा के चैथे दिन भी श्रोताओं की भारी भीढ़ उमड़ी थी। 12 फरवरी को कलश यात्रा के साथ प्रारंभ हुये इस भागवत कथा का समापन 19 फरवरी को प्रसाद वितरण एवं भण्डारा के साथ किया जायेगा।