फर्जी पट्टे के मामले में कलेक्टर ने दिए एफआईआर के आदेश

रामानुजगंज

नगर के बहुचर्चित अवैध तरीके से शासकीय भूमि के बनवाये गये पट्टे के मामले में आरोपी के विरूद्ध एफआईआर करने का आदेश कलेक्टर एलेक्स पाल मेनन द्वारा पारित किया गया है। रामानुजगंज शहर के ऐतिहासिक पर्यटन स्थल जलकेश्वर के पास की शासकीय भूमि का फर्जी तरीके से पट्टा बनवाये जाने के प्रकरण में उच्च न्यायालय का गलत व्याख्या कर आरोपी पट्टे धारी गोपाल प्रसास श्रीवास्तव से सांठ-गांठ कर साथ देने और उक्त पट्टे की भूमि में स्वयं तहसीलदार का खरीददार बन जाने के कारण पटवारी व तहसीलदार के विरूद्ध भी एफआईआर के आदेश एसडीएम रामानुजगंज को दिये गये है।

नगरी निकाय सीमा अंतर्गत वार्ड क्रमांक 1 स्थित शासकीय चिकित्सालय के सामने की भूमि जिसे नगर में पर्यटन स्थल के नाम से भी जाना जाता है। उसकी शासकीय भूमि 10 एकड़ और वार्ड क्रमांक 6 बुद्धूटोला की कुल 12.82 एकड़ शासकीय भूमि का फर्जी पट्टा तात्कालीन राजस्व अधिकारी से सांठ-गांठ कर बनवा लिया गया था। आरोपी पट्टेदार के पिता स्व. कुलदीप सहाय श्रीवास्तव, स्वयं शासकीय कर्मचारी थे और सेटलमेंट के समय से दर्जनों एकड़ भूमि के स्वामी थे। उसके पुत्र गोपाल श्रीवास्तव ने अपने पिता और स्वयं को भूमि हीन बतलाते हुये उक्त शासकीय भूमि का पट्टा बनवा लिया था। उक्त भूमि का पट्टा बनवाने के लिए आरोपी द्वारा संबंधित भूमि पर वर्ष 1953 से अपने पिता का कब्जा बताकर पक्का मकान एवं कुआ निर्माण कर सह परिवार निवासरत बतलाया था। इसी कब्जे को मूल आधार बनाकर तात्कालीन एसडीएम रामानुजगंज से मिली भगत कर 12. 82 एकड भूमि का पट्टा अपने नाम बनवाया गया था। जबकि उक्त भूमि पर आज तक एक झोपड़ी का निर्माण भी नहीं हुआ है। केवल कागजी दस्तावेजों में कब्जा बतलाकर आरोपी पट्टा बनवाने में सफल रहा। इस मामले में तात्कालीन कलेक्टर सरगुजा द्वारा पट्टा निरस्त किया गया था। इसके बाद गोपाल श्रीवास्तव कमिशनर एवं राज्य शासन से मुकदमा हारते हुये उच्च न्यायालय की शरण ली थी। उच्च न्यायालय का आदेश का गलत व्याख्या कर उसके आदेश को अपने पक्ष में बतलाते हुये गोपाल श्रीवास्तव ने रामानुगंज तहसीलदार से मिली भगत कर पुनः राजस्व रिकार्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया था। दूसरी बार राजस्व रिकार्ड में अपना नाम दर्ज कराने के बाद आनन-फानन में फर्जी पट्टे के आधार पर शासकीय भूमि को बेचना चाहा उसी क्रम में पूरे कार्यगुजारी में साथ देने लिए उक्त भूमि में से 1 एकड़ भूमि तात्कालीन तहसीलदार आरएस लाल को दे दिया। 1 एकड़ भूमि को तहसीलदार ने अपनी पत्नी के नाम क्रय करना बतलाया और पति के स्थान पर अपने स्व. पिता के नाम दर्ज करा तथ्य को छिपाने का प्रयास किया गया। उक्त मामले में कलेक्टर ने एसडीएम रामानंुजगंज से जांच कराने के बाद आरोपियों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की है।