स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह का अविकल संदेश..!

जम्मो संगी-जहुंरिया, सियान-जवान, दाई-बहिनी अऊ लइका मन ला जय जोहार। आप जम्मो मन ला सुराजी तिहार के गाड़ा-गाड़ा बधाई। ए पावन बेरा म सबले पहिली अमर सहीद मन ल सुमरत हंव। जम्मो पुरखा मन ल सरधा-फूल अरपन करत हंव।
आजादी का महत्व समझने के लिए, उन वीरों के बलिदान को समझना होगा, जिनकी नजरों में भारत माता की आन-बान और शान से बड़ा कुछ भी नहीं था। जिनकी सांसों में ‘वंदेमातरम्’ रचा-बसा था। जो गुलामी के अभिशाप को समाप्त करने के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने को तैयार रहते थे। आज सत्तरवें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मैं उन सभी विभूतियों को नमन करता हूं, जिन्होंने शहादत दी या आजादी के बाद राष्ट्र निर्माण को दिशा देते रहे।

मुझे यह कहते हुए बहुत गर्व होता है कि छत्तीसगढ़ के वीरों ने सन् 1857 के काफी पहले, यहां आजादी की लड़ाई की अलख जगा दी थी। अलग-अलग समय में आदिवासी समाज के वीर गैंद सिंह और वीर गुण्डाधूर ने अपने जांबाज साथियों के साथ बस्तर के घने वनांचल में और वीर नारायण सिंह ने मैदानी अंचल में क्रान्ति का शंखनाद किया था और शहादत दी थी। कालांतर में राज्य के हर क्षेत्र में वीर सपूतों ने बढ़-चढ़कर स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया। बहुत से लोगों ने शहादत दी और फिरंगियों की प्रताड़ना सही। आज मैं उन सभी को नमन करता हूँ।
शहादत का ऋण चुकाया नहीं जा सकता, बल्कि शहीदों के सपने पूरे करना, आने वाली पीढ़ियों का कर्तव्य होता है। आजादी मिलने के बाद सात दशकों के सफर में देश ने विकास का लम्बा सफर तय किया, लेकिन उसकी दिशा और दशा के कारण सभी को समान रूप से न्याय नहीं मिला। वर्ष 2003 से लगातार मिले जनादेश से वास्तव में हमें छह दशकों की निराशा को खत्म करने और चौमुखी विकास करने का अवसर मिला। अब छत्तीसगढ़ अपने विकास की तेज गति और विकास में सबको भागीदार बनाने की अपनी पहल के लिए पहचाना जाता है।
मैं सबसे पहले अपने राज्य के अन्नदाताओं को साधुवाद देता हूं, जिन्होंने विगत वर्ष सूखे के कठिन दौर में भी धैर्य नहीं खोया और साहस के साथ परिस्थितियों का सामना करते रहे। मुझे खुशी है कि हम सूखा राहत के तहत लगभग दो हजार करोड़ रू. की लागत से ऐसे काम करने में सफल हुए, जिससे किसान भाइयों को संकट में संबल मिला। इस वर्ष अच्छी बरसात से फिर खेतों में बहार आ रही है। साथ ही माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की अतिसंवेदनशील पहल पर ‘प्रधानमंत्री कृषि फसल बीमा योजना’ का सुरक्षा-कवच भी उपलब्ध करा दिया गया है, जो इतिहास में सबसे कम प्रीमियम में सर्वाधिक सुरक्षा देने वाली योजना है।

कृषि को लाभदायक बनाने के नए उपायों के तहत कृषक सहकारी समितियों को बीज उत्पादन से जोड़ने की अभिनव पहल के कारण, बीज उत्पादन में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी हुई है। हम 32 लाख से अधिक किसानों को ‘सॉइल हेल्थ कार्ड’ उपलब्ध करा रहे हैं ताकि वे अपने खेत के अनुरूप ज्यादा उत्पादन देने वाली फसलें पैदा करें। इसके लिए 26 पूर्ण प्रयोगशालाएं और 111 लघु प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं। दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और गरियाबंद जिलों को पूर्णतः जैविक जिला और शेष 23 जिलों के एक-एक विकासखण्ड को जैविक कृषि क्षेत्र बनाया जा रहा है। इस वर्ष ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ प्रारंभ हो रही है, जिसमें ड्रिप संयंत्र की स्थापना हेतु 40 से 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। उद्यानिकी फसलों की सुरक्षा के लिए बाड़ या फेंसिंग निर्माण की योजना शुरू की गई है, जिसमें किसानों को आर्थिक मदद दी जाएगी।

यह एक विडम्बना ही है कि प्रदेश में अभी भी 813 गांव ऐसे हैं, जिनका भूमि सर्वेक्षण नहीं हुआ है, जिसके कारण वहां का कोई स्थायी भू-अभिलेख नहीं है। इससे किसानों को अपना हक सिद्ध करने में कठिनाई होती है। अब हमने निर्णय लिया है कि दो वर्ष के भीतर ऐसे सभी गांवों का सर्वेक्षण पूर्ण कर लिया जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि का पृथक से कोई नक्शा या भू-अभिलेख नहीं होने के कारण वे जिस जमीन पर काबिज हैं तथा जहां उनका मकान बना है, उसका कोई दस्तावेज नहीं बना है। इसके कारण आबादी भूमि का क्रय-विक्रय, बैंक ऋण लेना या अदालती कामकाज आदि में उन्हें बड़ी तकलीफ होती है। इस स्थिति को समाप्त करने के लिए हमने निर्णय लिया है कि आबादी भूमि का सर्वेक्षण इस वर्ष पूर्ण कर आबादी पट्टा वितरण शुरू कर दिया जाए। इसका लाभ लगभग 46 लाख ग्रामीण परिवारों को मिलेगा। इसी प्रकार ग्रामीण अंचल के सभी खातेदारों को राजस्व भू-अभिलेख में दर्ज उनकी भूमि का खसरा, बी-1 तथा नक्शे की प्रमाणित प्रतिलिपि निःशुल्क दी जा रही है।

हमने तेन्दूपत्ता की तरह अन्य लघु वनोपजों का लाभ वनवासियों को दिलाने की जो पहल की थी, वह निरंतर आगे बढ़ाई जा रही है। विगत वर्ष 14 लाख मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण किया गया, जिसका संग्रहण पारिश्रमिक 204 करोड़ रू. और विगत वर्षों का बोनस 73 करोड़ रू. संग्राहक परिवारों को वितरित किया गया है। इमली, चिरौंजी-गुठली, महुआ-बीज, लाख, साल-बीज की खरीदी भी हमने ढाई वर्ष पहले न्यूनतम समर्थन मूल्य पर शुरू की थी, जिससे संग्रहकर्ताओं को अब तक 71 करोड़ रू. की आय हुई।
वन्य प्राणियों से होने वाली जनहानि के लिए दी जाने वाली क्षतिपूर्ति राशि 3 लाख रू. से बढ़ाकर 4 लाख रू. कर दी गई है। पशु हानि की राशि 20 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रू. कर दी गई है। हाथी प्रभावित क्षेत्रों में फसल को हुए नुकसान की भरपाई की दर 6 हजार रू. से बढ़ाकर साढ़े 22 हजार रू. प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। प्रदेश को हरा-भरा बनाए रखने के लिए ‘हरियर छत्तीसगढ़’ योजना के अंतर्गत 10 करोड़ पौधों का रोपण इस वर्ष किया जा रहा है।

प्रदेश में सिंचाई सुविधाएं बढ़ाकर ही हम किसानों को मानसून के भरोसे रहने से बचा सकते हैं। इसलिए छह दशक में जो सिंचाई क्षमता 23 प्रतिशत बन पाई थी, उसे हमने एक दशक में बढ़ाकर    34 प्रतिशत से अधिक कर दिया है। एक नई पहल करते हुए हमने ‘लक्ष्य भागीरथी अभियान’ शुरू किया है, और 106 अपूर्ण परियोजनाओं की पहचान कर इन्हें जल्दी पूर्ण करने की कार्ययोजना बनाई गई है। इस तरह आगामी एक वर्ष में 88 योजनाएं पूर्ण कर 71 हजार हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता निर्मित की जाएगी।

बिजली पहुंचाने में कठिनाई वाले स्थानों पर किसान भाई लम्बे समय से असाध्य पम्पों की समस्या से जूझ रहे थे। इन स्थानों के लिए हम ‘सौर सुजला योजना’ शुरू कर रहे हैं, जिससे तीन वर्षों में 51 हजार सोलर-पम्प स्थापित किए जाएंगे। इस वर्ष 11 हजार सोलर-पम्प स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अलावा ऊर्जा संरक्षण के लिए एक और योजना प्रारंभ की गई है, जिसके तहत सभी जिलों में बीपीएल परिवारों को 3-3 एलईडी बल्ब निःशुल्क दिए जा रहे हैं तथा एपीएल परिवारों को रियायती दर पर 5 एलईडी बल्ब दिए जा रहे हैं।

हमारा प्रयास है कि बिजली, गांव से लेकर शहर तक हर तबके की ताकत बने। इसके लिए हम वर्ष 2018 तक शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य पूरा कर लेंगे। हमने बिजली की पहुंच को सांकेतिक ही नहीं रखा है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति के लिए ‘इंटीग्रेटेड पॉवर सिस्टम’ विकसित कर रहे हैं। अति उच्चदाब के 24 तथा  उच्चदाब के 194 नए विद्युत उपकेन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं, जो गुणवत्तापूर्वक पारेषण और वितरण का आधार बनेंगे। राजनांदगांव, रायगढ़, जांजगीर-चांपा में 100-100 मेगावॉट के ‘सोलर पॉवर प्लांट’ लगाने की योजना है।
शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए हम बहुस्तरीय प्रयास कर रहे हैं। नगरीय निकायों में ‘भागीरथी योजना’ के माध्यम से एक लाख 43 हजार निःशुल्क नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं, वहीं ग्रामीण अंचलों में ढाई लाख से अधिक हैण्डपम्पों तथा लगभग छह हजार स्थल योजनाओं के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। करीब 55 हजार शालाओं में पेयजल की व्यवस्था कर दी गई है। इतना ही नहीं, ग्रामीण अंचलों में भी घरेलू नल कनेक्शन देने के अभियान के तहत 2 लाख 37 हजार कनेक्शन दिए जा चुके हैं। सौर ऊर्जा से संचालित पम्पों के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने वाला, देश का पहला राज्य भी छत्तीसगढ़ बन गया है। प्रदेश में अब तक ऐसे ढाई हजार सोलर-पम्प स्थापित किए जा चुके हैं।

गर्व का विषय है कि रायपुर का चयन देश की अत्यन्त महत्वाकांक्षी ‘स्मार्ट-सिटी’ परियोजना के लिए किया गया है। ‘अमृत मिशन’ के तहत एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में उन्नत अधोसंरचना के विकास हेतु चार वर्षीय परियोजना शुरू की गई है। 70 शहरों में 369 आधुनिक सिटी बसें शुरू हो गई हैं। रायपुर, भिलाई, बिलासपुर, राजनांदगांव, धमतरी और कोरबा में एक लाख से अधिक ‘पारंपरिक स्ट्रीट लाइट्स’ को हटाकर ‘एल.ई.डी. लाइट’ लगाई जा रही है। रायपुर, दुर्ग व बिलासपुर में सौ-सौ सीटर कामकाजी महिला छात्रावास बनाए जाएंगे। शहरों में निवेश क्षेत्रों में अनियमित तरीके से हुए आवासीय एवं गैर-आवासीय निर्माण कार्यों को नियमित करने की प्रक्रिया  सरल तथा रियायती कर दी गई है, जिससे जनता को काफी राहत मिलेगी और उन्हें भविष्य की चिंता से निजात मिलेगी।
गांवों के विकास में पंचायतों की भूमिका को और अधिक मजबूत करने के लिए नई ‘जिला पंचायत विकास निधि योजना’ शुरू की गई है। इसके अंतर्गत 4 विकासखण्ड तक वाले जिलों को प्रतिवर्ष एक करोड़ रू. तथा 5 या अधिक विकासखण्ड वाले जिलों को 2 करोड़ रू. मूलभूत सुविधाएं जुटाने के लिए दिए जाएंगे। ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण यांत्रिक विद्युतीकरण योजना’ के अन्तर्गत लगभग 1 हजार 8 सौ गांवों में ‘स्ट्रीट लाइट’ लगाई जा रही है। ग्रामीण अंचलों में गरीब परिवारों के मुखिया या कमाऊ सदस्य की मृत्यु होने पर 2 हजार रू. की एकमुश्त तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु ‘श्रद्धांजलि योजना’ शुरू की गई है। महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत  जरूरत के अनुरूप पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराने में हम सफल हुए हैं। इतना ही नहीं, मनरेगा में काम कर चुके परिवारों के एक-एक सदस्य को कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

मुझे खुशी है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सपने को साकार करने की दिशा में हमारे राज्य में दो हजार 432 ग्राम पंचायतें, चार हजार 311 गांव, दो विकासखण्ड खुले में शौच से मुक्त घोषित हो चुके हैं। उन्नीस विकासखण्ड अपने संकल्प को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़े हैं। मुझे विश्वास है कि इस वर्ष 6 जिले खुले में शौचमुक्त बनने में सफल होकर दिखाएंगे। मैं अपील करता हूं कि सभी ग्राम पंचायतें और जिले 2018 तक ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कमर कस लें।

ग्राम और नगर पंचायतों के प्रतिनिधियों को राज्य के विकास और उपलब्धियों से भावनात्मक रूप से जोड़ने के लिए ‘हमर छत्तीसगढ़ योजना’ शुरू की गई है, जिसके तहत 2 वर्षों में पौने दो लाख लोग रायपुर तथा नया रायपुर में स्थित विभिन्न संस्थाओं का अवलोकन करेंगे। यहां आने वाले जनप्रतिनिधि अपने गांव से मिट्टी, पानी और पौधे लाकर, नया रायपुर स्थित बॉटनिकल गार्डन में पौधे रोप रहे हैं। इस योजना से प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों के बीच आपसी संवाद, अवलोकन, अध्ययन और सहभागिता का नया अध्याय शुरू हो गया है।
मुझे खुशी है कि महिलाओं के सम्मान के संस्कार राज्य की अनमोल विरासत है। लेकिन नारी-सशक्तीकरण एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसके तहत बदलते सामाजिक परिवेश में यथोचित उपाय किए जाते हैं। हमने महिलाओं को तात्कालिक संकट से उबारने के लिए टोल फ्री ‘महिला हेल्पलाइन 181’ शुरू की है। ‘सखी’ वन स्टॉप सेंटर स्थापित करने वाले हम देश के पहले राज्य बन गए हैं। अब संकटग्रस्त बच्चों की सहायता के लिए भी टोल फ्री ‘चाइल्ड हेल्पलाइन 1098’ का विस्तार सभी जिलों में किया जा रहा है। हम आंगनवाड़ी केन्द्रों से प्रतिदिन 25 लाख से अधिक गर्भवती, शिशुवती माताओं और छह वर्ष तक के बच्चों को पूरक पोषण आहार दे रहे हैं, जिसके कारण कुपोषण का स्तर 10 वर्षों में 17 प्रतिशत घटकर लगभग 30 प्रतिशत रह गया है, जिसे आगामी 5 वर्षों में घटाकर 15 प्रतिशत लाना है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने महिलाओं को धुआंरहित रसोई का उपहार देने के लिए ‘उज्ज्वला योजना’ शुरू की है, जिसके तहत प्रदेश की लगभग 25 लाख महिलाओं को रियायती दर पर रसोई गैस उपलब्ध कराएंगे। हमने राज्य में इस पहल को आगे बढ़ाते हुए मात्र 200 रू. की रजिस्ट्रेशन राशि पर गैस कनेक्शन के साथ दो बर्नर वाला गैस चूल्हा और पहला भरा सिलेण्डर देने का निर्णय लिया है। प्रदेश की ममतामयी माताओं-बहनों को धुआं, आंसू, जलन और दमा जैसी बीमारियों से आजादी दिलाने में यह  कदम मील का पत्थर साबित होगा।

हमने अपना वादा निभाते हुए अंबिकापुर में नया चिकित्सा महाविद्यालय शुरू कर दिया है। ‘जन्म सहयोगी कार्यक्रम’ के तहत प्रसूति कक्ष में महिला के साथ उनकी निकट परिचिता के रहने की सुविधा दी गई है, ताकि भावनात्मक सहयोग मिले व प्रसव सुरक्षित हो। ‘चिरायु कार्यक्रम’ के अन्तर्गत आंगनवाड़ी केन्द्रों में वर्ष में दो बार तथा स्कूलों में वर्ष में एक बार स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है।  300 चिकित्सकों की भर्ती से मरीजों को बेहतर सेवा मिल रही है।

हमने सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से कारगर जनसुविधाएं देने के लिए 5 हजार लोक सेवा केन्द्र शुरू कर दिए हैं जो 37 प्रकार की शासकीय सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इनमें से जिला या तहसील कार्यालय परिसर में संचालित 175 केन्द्रों ने ही विगत डेढ़ वर्षों में   16 लाख प्रमाण-पत्र जारी कर दिए हैं। ऐसे केन्द्र सभी ग्राम पंचायतों में स्थापित करने के लिए नई योजना शुरू की जा रही है।
हमने सेवाकाल के दौरान मृत होने वाले शासकीय सेवकों के परिवारों को राहत देने के लिए नियमों में संशोधन करते हुए अब विवाहित पुत्री, बहन व पुत्र वधु को भी अनुकम्पा नियुक्ति की पात्रता दे दी है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को स्थायी जाति तथा निवास प्रमाण-पत्र उनके स्कूलों के माध्यम से ही देने का निर्णय लिया गया है। जिले के सक्षम अधिकारियों द्वारा जारी किए गए जाति प्रमाण-पत्रों को सार्वजनिक करने के लिए उसे जिला कार्यालय की वेबसाइट में प्रदर्शित करने का निर्णय लिया गया है। आदिवासी बहुल जिला बलरामपुर प्रदेश का ऐसा पहला जिला बन गया है, जिसकी 99 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को ‘ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क’ से  जोड़ा जा चुका है। प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों को ‘ओ.एफ.एन.’ से जोड़ा जाएगा, ताकि गांवों से राजधानी तक सुगम-सम्पर्क बन जाए।

शिक्षा वास्तव में मन को बलवान, सक्षम और भ्रांतियों से आजाद करती है। यह भावी पीढ़ी की मजबूती का आधार भी है। इसलिए हमने शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के लिए शाला स्तर पर ‘‘डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम शिक्षा गुणवत्ता अभियान’’ शुरू किया है। मैंने स्वयं स्कूल का अवलोकन किया। साथ ही सभी मंत्रियों, मुख्य सचिव से लेकर विभिन्न स्तर के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों व गणमान्य नागरिकों को इस काम से जोड़ा गया है। इसके अन्तर्गत शालाओं का सामाजिक अंकेक्षण कराया गया है व सुधार का कार्य शुरू किया गया है। गणित और अंग्रेजी की पढ़ाई को रूचिकर बनाने के लिए रोचक पुस्तकें तैयार कर शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शाला स्तर से रोजगारपरक शिक्षा देने के लिए आई.टी., ऑटोमोबाइल, मीडिया एवं इंटरटेनमेंट, कृषि सहित 8 विषयों को वैकल्पिक पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।

मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि राज्य में आईआईटी शुरू करने का सपना साकार हुआ है। इस तरह छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर की समस्त उच्च शैक्षणिक संस्थाओं का गढ़ भी बन गया है। विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालयों में भी गुणवत्ता उन्नयन का अभियान चलाया जा रहा है। अधिकांश संस्थाओं में ‘ऑनलाइन एडमिशन’ की सुविधा प्रारंभ की गई है। बुनियादी सुविधाओं के लिए ‘महाविद्यालयीन पंचमुखी विकास कार्यक्रम’ शुरू किया गया है। महाविद्यालयों का ‘100 बिन्दुओं पर मूल्यांकन’ किया जा रहा है।

मेरा पूरा भरोसा युवा शक्ति पर है। सही दिशा और सही सुविधाएं मिलने पर हमारे युवा असंभव को संभव बना देते हैं। इसलिए हमने युवाओं के शिक्षण-प्रशिक्षण और स्वावलंबन के हरसंभव कदम उठाए हैं। ‘मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना’ के तहत करीब 93 करोड़ रू. का ऋण वितरित किया जा चुका है। ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ के पालन में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल है। हमारे ‘कौशल उन्नयन’ के प्रयासों से 2 लाख 35 हजार से अधिक युवा प्रशिक्षित हो चुके हैं और आगामी 3 वर्षों में सवा चार लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। सभी 27 जिलों में ‘लाइवलीहुड कॉलेज’ संचालित हैं। लगभग सभी जिलों में पॉलीटेक्निक संस्थाएं स्थापित की जा चुकी हैं। इस तरह विकास के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन राज्य में ही उपलब्ध कराने की दिशा में हमारे प्रयास जारी हैं। इतना ही नहीं, अब हम प्रदेश की नई युवा-नीति बना रहे हैं, जिसमें युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।

हम खेल को भी युवाओं के कैरियर निर्माण का एक माध्यम बना रहे हैं। क्रिकेट तथा हॉकी के लिए अन्तरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियमों पर अन्तरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित हो रही हैं। खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य में हॉकी, बॉस्केट बाल, तीरंदाजी, महिला कबड्डी, नौकायन और जूडो की अकादमी खोली जा चुकी है। टेनिस की अकादमी रायपुर में खोली जा रही है तथा बिलासपुर में भी एक राज्य खेल प्रशिक्षण केन्द्र निर्माणाधीन है, जिसमें एथलेटिक्स तथा अन्य खेल की सुविधाएं होंगी। यह गौरव का विषय है कि इस बार रियो ओलंपिक में राजनांदगांव में जन्मी व पली-बढ़ी रेणुका यादव हॉकी तथा बिलासपुर में रेलवे में कार्यरत लक्ष्मीरानी मांझी को तीरंदाजी के जौहर दिखाने का अवसर मिला। बेटियों की यह उपलब्धि अपने आप में ऐतिहासिक तथा अभूतपूर्व है। मुझे विश्वास है कि इससे हमारे राज्य के युवाओं का उत्साह और बढ़ेगा।

मुझे यह कहते बहुत गर्व है कि आदिवासी तथा नक्सल पीड़ित अंचलों में शिक्षा के स्तर के उन्नयन के कार्य रंग ला रहे हैं। ‘प्रयास’ संस्थाओं में पढ़ने वाले बच्चों ने अखिल भारतीय स्तर की परीक्षाओं में सफलताएं हासिल करते हुए देश के प्रसिद्ध आईआईटी, एनआईटी  आदि संस्थाओं में दाखिला लिया है। सुविधाओं का सिलसिला बढ़ाते हुए हम 15 और आदिवासी विकासखंडों में 500 सीटर छात्रावास बनाने जा रहे हैं। जगदलपुर में अनुसूचित जनजाति के लिए तथा मुंगेली में अनुसूचित जाति के लिए ‘क्रीड़ा परिसर’ शुरू किए गए हैं। कमजोर तबकों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए भी नई योजनाएं शुरू की गई हैं। विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए मुख्यमंत्री ग्यारह सूत्रीय कार्यक्रम, प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत 100 अनुसूचित जाति बहुल गांवों के विकास हेतु कार्य योजना बनाई गई है। अल्पसंख्यक समुदाय के लिए जशपुर में ‘मल्टीसेक्टोरल डेव्हलपमेंट प्रोग्राम’ संचालित किया जा रहा है। नया रायपुर में 22 एकड़ क्षेत्र में, 100 करोड़ रू. की लागत से ‘ट्रायबल रिसर्च इंस्टीट्यूट’ के निर्माण हेतु शिलान्यास किया जा चुका है। मैं चाहूंगा कि शीघ्र ही यह संस्थान आकार ले तथा अनुसूचित जनजाति से संबंधित विभिन्न पहलुओं के शोध, अनुसंधान, संरक्षण तथा संवर्धन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।

हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने खनिज धारित राज्यों को उनकी बरसों पुरानी चिंता से मुक्त कर दिया है। नवीन खनिज आवंटन नीति से हमें नए संसाधनों की सौगात मिली है। हमने देश के पहले चूना पत्थर ब्लॉक और पहली सोने की खदान की नीलामी सफलतापूर्वक करते हुए एक नया इतिहास रचा है। मुझे यह कहते हुए खुशी है कि हमने सभी 27 जिलों में जिला खनिज संस्थान ट्रस्ट का गठन कर दिया है, जिसमें प्रतिवर्ष 11 सौ करोड़ रू. का अंशदान मिलेगा। इस राशि का उपयोग स्थानीय विकास की उच्च प्राथमिकता वाले कार्यों में किया जाएगा और इससे खनिज धारित जिलों में तेजी से विकास के कार्य हो सकेंगे।

राज्य में चौतरफा विकास की जो क्रान्ति हो रही है, उसे आवश्यक बुनियादी अधोसंरचना का सहयोग चाहिए। सड़क, रेलमार्ग और टेली-कनेक्टिविटी ऐसे साधन हैं जिनके बिना गांवों और शहरों के बीच का फर्क खत्म नहीं हो सकता। इसलिए हमने बड़े पैमाने पर ऐसे सम्पर्क-सेतु बनाने का निर्णय लिया है, जो दूरियां घटा दें। विगत एक वर्ष में सरकार द्वारा लगभग 3 हजार 8 सौ किलोमीटर सड़कों का निर्माण तथा साढ़े तीन सौ किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग का उन्नयन किया गया है। ‘छत्तीसगढ़ राज्य सड़क परियोजना’, ‘एल.डब्ल्यू.ई. योजना’, ‘राष्ट्रीय राजमार्ग’ और ‘छत्तीसगढ़ सड़क विकास निगम’ के माध्यम से 11 हजार कि.मी. से अधिक सड़कों के निर्माण का काम विभिन्न चरणों में है, जिसमें से 28 सौ करोड़ रू. की लागत से, 924 कि.मी. लम्बी, 27 सड़कों के निर्माण हेतु छत्तीसगढ़ सड़क विकास निगम के प्रस्ताव को हाल ही में मंजूरी दी गई है।

किसी भी क्षेत्र के विकास में रेल परिवहन सुविधाओं के अहम योगदान को देखते हुए हमने प्रदेश में नए रेलमार्गों की संभावनाएं तलाशने, परियोजनाएं बनाने, संसाधन जुटाने और शीघ्र निर्माण सुनिश्चित करने हेतु रेलवे के साथ ‘ज्वाइंट वेंचर’ बनाया है। इस रास्ते पर चलते हुए, साझी पहल और भागीदारी की रणनीति से   546 कि.मी. रेलवे लाइनों का निर्माण प्रगति पर है। वहीं अन्य      884 कि.मी. रेलवे लाइनों के विकास का मार्ग भी प्रशस्त किया गया है। इसी प्रकार नक्सल प्रभावित अंचलों में 146 मोबाइल टॉवर स्थापित कर दिए गए हैं।
बस्तर की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां मोबाइल तथा इंटरनेट सेवा से पहुंच और सम्पर्क बनाने की जरूरत है, जो बस्तर के सभी सातों जिलों को एकसूत्र में जोड़े। इसलिए मैं आज ‘बस्तर-नेट’ परियोजना शुरू करने की घोषणा करता हूं, जिसके तहत 40 करोड़ रू. की लागत से 832 किलोमीटर लम्बे ‘ऑप्टिकल फाइबर केबल’ बिछाए जाएंगे। यह नेटवर्क ‘रिंग पद्धति’ से निर्मित होने के कारण वैकल्पिक मार्गों से निर्बाध मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान कर सकेगा। यह बस्तर में राज्य सरकार का ‘डिजिटल हाइवे’ होगा, जो ज्ञान-आधारित समाज, अवसर और अर्थव्यवस्था के विकास की नई क्रान्ति लाने में सहायक होगा, इससे शासकीय सेवाओं में पारदर्शिता, तीव्रता तथा जवाबदेही भी बढ़ेगी। सरकारी कर्मचारियों के लिए सभी 146 विकासखण्ड मुख्यालयों में 827 करोड़ रू. की लागत से

साढ़े छह हजार आवास बनाने का निर्णय लिया गया है, जिससे वे ज्यादा दक्षता से जनसेवा कर सकेंगे।
अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी जी ने आजाद भारत के लिए जो सपना देखा था, उसमें ग्राम स्तर तक स्वच्छता, स्वावलंबन और समाज के सबसे आखरी व्यक्ति की सक्षमता महत्वपूर्ण थी। एकात्म-मानववाद के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय तथा प्रखर राष्ट्रवादी डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी जैसे मनीषियों के विचारों को हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भली-भांति समझा और देश में पहली बार ऐसा वातावरण बनाने में सफलता हासिल की है, जिससे इन महापुरुषों के सपनों को पूरा किया जा सकेगा। ‘प्रधानमंत्री जन-धन योजना’ के तहत 99 प्रतिशत से अधिक बैंक खाते, ‘प्रधानमंत्री बीमा योजनाओं’ में छत्तीसगढ़ का अव्वल रहना, ‘डिजिटल इंडिया’ के माध्यम से नागरिक सशक्तीकरण, ‘स्टार्ट-अप’ तथा ‘स्टैण्ड-अप’ योजनाओं में हमारी सशक्त नीतियों के माध्यम से भागीदारी, हम सबके लिए गौरव का विषय है।

छत्तीसगढ़ के समग्र, समन्वित और समावेशी विकास के मार्ग में एक चुनौती वामपंथी उग्रवाद के रास्ते से आई थी। हम इन राष्ट्र विरोधी, लोकतंत्र विरोधी तथा संविधान विरोधी तत्वों को राष्ट्रीय स्तर पर बेनकाब करने में सफल हुए हैं और अब इनके निर्णायक रूप से समाप्ति की ओर बढ़ रहे हैं। नक्सल प्रभावित अंचलों में सुरक्षा और विकास की साझी रणनीति कारगर हो रही है। हाल ही में केन्द्र सरकार ने सी.आर.पी.एफ. की ‘बस्तरिया बटालियन’ का गठन करने का निर्णय लेकर उन सपनों को पूरा किया है, जो कभी दमन और शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वाले हमारे वीर शहीद गैंद सिंह, वीर गुण्डाधूर तथा वीर नारायण सिंह ने देखा था। मेरी कामना है कि ‘बस्तरिया बटालियन’ बस्तर संभाग के हमारे युवाओं के शौर्य और पराक्रम का प्रतीक बने।
छत्तीसगढ़ सर्वांगीण विकास के सुनहरे रास्ते पर मजबूत कदमों से बढ़ चला है। मेरा विश्वास है कि हम सब मिलकर आजादी के नायकों के हर सपने पूरे करेंगे।