जांजगीर-चांपा। जिले में जांजगीर यातायात पुलिस का तथाकथित चेकिंग अभियान अब लोगों के लिए सिरदर्द बन गया है। खोखरा चौक पर रोज़ाना दोपहिया वाहन चालकों को रोककर केवल एक ही बहाने—“पॉल्यूशन कागज OK नहीं”—पर खुलेआम वसूली की जा रही है। आरोप है कि नियमों की आड़ में कम से कम 300 रुपये वसूलना आम बात हो गई है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि कार सवारों पर कार्रवाई करने से कतराने वाली पुलिस का सारा जोर आमजनों और ग्रामीणों पर चलता है। आसपास के गांवों से रोज़गार के लिए शहर आने वाले भोले-भाले ग्रामीण इन कर्मियों के आसान टार्गेट बने हुए हैं। चेकिंग के नाम पर न तो सुरक्षा मानकों का पालन दिखता है, न ही यातायात सुधार की मंशा, बस खानापूर्ति और अवैध वसूली इनका रोजाना का काम हैं।
वसूली का टारगेट पूरा होते ही पुलिस मौके से गायब हो जाती है और ट्रैफिक व्यवस्था भगवान भरोसे छोड़ दी जाती है। जनता का सवाल है कि क्या कानून सिर्फ गरीबों के लिए है? क्या नियमों का डर सिर्फ दोपहिया चालकों तक सीमित है?
अब जरूरत है कि पुलिस प्रशासन तत्काल संज्ञान ले, निष्पक्ष चेकिंग सुनिश्चित करे और वसूली करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करे, वरना जनआक्रोश बढ़ना तय है।
महीनों से शहर के प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल बंद….
शहर के चौक चौराहों के सिग्नल, सीसीटीवी कैमरे खराब पड़े हैं, लेकिन यातायात पुलिस का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। सिग्नल बंद होने से रोज़ जाम की स्थिति बन रही है, वहीं कैमरे खराब होने से यातायात नियमों की निगरानी भी ठप है। नागरिकों ने जल्द मरम्मत और व्यवस्था सुधार की मांग की है।
