अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ के फेफड़े कहे जाने वाले हसदेव अरण्य को बचाने की मुहिम अब एक बड़े सियासी मोड़ पर पहुंच चुकी है। सरगुजा जिले के ऐतिहासिक रामगढ़ में आयोजित रामगढ़ संरक्षण और संवर्धन समिति की एक दिवसीय परिचर्चा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (पीसीसी चीफ) दीपक बैज ने एक बड़ा ऐलान करते हुए सियासी तापमान बढ़ा दिया है। बैज ने साफ किया है कि हसदेव अरण्य और प्राकृतिक संपदा को बचाने के इस बड़े आंदोलन में आने वाले दिनों में खुद कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी शामिल होंगे। इस बड़े ऐलान के बाद अब गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या राहुल गांधी की एंट्री के बाद हसदेव में चल रही पेड़ों की कटाई और खनन पर रोक लग पाएगी?
रामगढ़ की पुरातात्विक और ऐतिहासिक पहाड़ी पर आयोजित इस भव्य परिचर्चा में हसदेव और प्राकृतिक संपदा के संरक्षण पर गंभीर मंथन किया गया। इस कार्यक्रम में न केवल हजारों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण, विभिन्न सामाजिक संगठन और पर्यावरण प्रेमी जुटे, बल्कि कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने भी मंच साझा किया। पीसीसी चीफ दीपक बैज के साथ पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव सहित क्षेत्र के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया है कि कांग्रेस अब इस मुद्दे पर आर-पार के मूड में है। परिचर्चा के दौरान वक्ताओं ने रामगढ़ की ऐतिहासिक पहाड़ी और पूरे क्षेत्र के पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की।
इस एक दिवसीय विमर्श के दौरान हसदेव अरण्य में हो रही पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन और स्थानीय आदिवासियों की सांस्कृतिक विरासत के विनाश का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। मंच से बोलते हुए नेताओं और पर्यावरणविदों ने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अब एक जुट होने का समय आ गया है। इस दौरान प्राकृतिक संपदा के संरक्षण और अनियंत्रित दोहन को तुरंत रोकने की मांग को लेकर जोरदार आवाज उठाई गई, जिसे स्थानीय ग्रामीणों का भी भारी समर्थन मिला।
राजनीतिक रूप से इस परिचर्चा के जरिए कांग्रेस ने सत्ताधारी भाजपा और कोल खनन समूहों की नीतियों पर जमकर निशाना साधा। नेताओं ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर आदिवासियों के अधिकारों और पर्यावरण की बलि दी जा रही है। दीपक बैज के राहुल गांधी वाले बयान ने इस पूरे स्थानीय मुद्दे को अब राष्ट्रीय पटल पर ला खड़ा किया है। अब देखना यह होगा कि राहुल गांधी के इस आंदोलन में सीधे शामिल होने की घोषणा के बाद सरकार और खनन कंपनियों का रुख क्या होता है और हसदेव को बचाने की यह जंग क्या नया मोड़ लेती है।
