@संजय यादव
जांजगीर-चांपा । जिले में कानून-व्यवस्था की तस्वीर चिंताजनक होती जा रही है। पुलिस पर आरोप है कि पुलिस की कसावट खत्म हो चुकी है और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। एडिशनल एसपी उमेश कश्यप की कार्यप्रणाली को लेकर जिलेभर में तीखी चर्चा है। पुलिसिया कार्रवाई में भाई-भतीजावाद, पहुंच और प्रभावशाली आरोपियों को संरक्षण देने के आरोप खुलकर सामने आ रहे हैं।
धान खरीदी में भ्रष्टाचार के आरोपी और कोतवाली में हंगामा करने वाले युवक की गिरफ्तारी अब तक न होना पुलिस की नीयत पर सवाल खड़े करता है। रेत माफिया से मिलीभगत के आरोपों ने जिले को बदनाम कर दिया है। अवैध रेत कारोबार खुलेआम जारी है, जबकि कार्रवाई सिर्फ कागजों और फोटो सेशन तक सीमित बताई जा रही है। यहाँ तक रेत माफियाओं द्वारा खुले आम जनप्रतिनिधियों को जान से मारने की धमकी दी जा रही हैं। रेत के कारोबार में जुड़े कश्यप परिवार में युवक को गोली मार कर हत्या का मामला सबके सामने हैं। पुलिस आरोपियों को पकड़ कर अपनी पीड़ थपथपा रही है।
चोरी, हत्या, लूट, जुआ और अवैध शराब का कारोबार तेजी से फैल रहा है। रात्रि गश्त की पोल खुद वारदातें खोल रही हैं। अपराधी बेखौफ हैं, पुलिस का भय खत्म होता दिख रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह कि एसपी विजय पाण्डेय ने जिस भरोसे और साख को मेहनत से बनाया, उसे एएसपी की कथित लापरवाही नुकसान पहुंचा रही है।
कई मामले अभी पेंडिंग पड़े है जिसको सुलझाने की जरूरत पुलिस को है लेकिन पुलिस सिर्फ हाथ में हाथ धरे बैठी है। जांच के नाम पर कार्रवाई करने से बच रही है। जिले में ऐसी चर्चा है कि एएसपी द्वारा मीडिया से दूरी और सवालों से बचने का रवैया आग में घी डाल रहा है। अब जिले को सख्त, निष्पक्ष और पारदर्शी पुलिसिंग की सख्त जरूरत है।
