रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आबकारी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने “ऑपरेशन आघात” के तहत ब्रांडेड बोतलों में नकली शराब भरकर बेचने वाले एक बड़े संगठित नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। नामी कंपनियों के नाम पर जहर परोसने वाले इस गिरोह का भंडाफोड़ तब हुआ जब पुलिस ने बेहद फिल्मी और गोपनीय अंदाज में एक ‘प्वाइंटर’ (फर्जी ग्राहक) को भेजा और ‘गोवा ब्रांड’ की दो बोतलें खरीदवाईं। जांच में इन बोतलों के लेबल और होलोग्राम फर्जी पाए गए, जिसके बाद पुलिस की संयुक्त टीम ने जाल बिछाकर मुख्य आरोपी दुष्यंत पटेल उर्फ पप्पू को धर दबोचा। हालांकि, इस काले कारोबार के दो अन्य मुख्य किरदार आरोपी का भाई सुभाष पटेल और सहयोगी विनय सिंह अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।
इस पूरे ऑपरेशन की कमान संभाल रहे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देश पर जब कोतरारोड़, साइबर सेल और आबकारी विभाग की टीम ने ग्राम धनागर स्थित आरोपी के ठिकाने पर छापा मारा, तो नजारा देखकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए। आरोपी ने अपने घर के भीतर बनी पशुशाला (गाय के कोठे) को ही नकली शराब की मिनी फैक्ट्री बना रखा था। वहां से रॉयल स्टैग, इंपीरियल ब्लू (आईबी), ब्लैक डॉग, गोल्डन गोवा और किंगफिशर जैसी नामी ब्रांडेड कंपनियों के नकली लेबल लगी 869 बोतलें और लगभग 240 लीटर तैयार मिलावटी शराब बरामद की गई। इसके अलावा भारी मात्रा में स्पिरिट से भरे ड्रम, खाली बोतलें, ढक्कन और हूबहू दिखने वाले नकली होलोग्राम जब्त किए गए हैं, जो इस अवैध साम्राज्य की गहराई को बयां करते हैं।

जांच में इस गिरोह की जो कार्यप्रणाली (मोडस ऑपेरंडी) सामने आई है, वह बेहद शातिराना और डराने वाली है। यह गिरोह कबाड़ियों और अन्य स्रोतों से नामी ब्रांडों की खाली बोतलें इकट्ठा करता था। इसके बाद उन बोतलों में स्पिरिट, पानी और जानलेवा रसायनों का मिश्रण भरा जाता था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि शराब को असली रंग और खुशबू देने के लिए आरोपी ‘रेड लेबल’ चायपत्ती के पानी का इस्तेमाल करते थे। इस मिलावटी लिक्विड को बोतलों में भरकर उन पर नकली होलोग्राम और सील लगा दी जाती थी, जिससे आम उपभोक्ता तो क्या, अच्छे-अच्छे पारखी भी धोखा खा जाएं। इस नकली खेप को ग्रामीण इलाकों के ‘कोचियों’ (अवैध विक्रेताओं) के माध्यम से असली शराब के स्टॉक में मिलाकर खपाया जाता था।
गिरफ्तार आरोपी दुष्यंत पटेल ने पूछताछ में कबूल किया है कि वह यह जानलेवा धंधा कोरोना काल के समय से यानी पिछले कुछ सालों से धड़ल्ले से चला रहा था और अब तक इस नेटवर्क से लाखों रुपये का मुनाफा कमा चुका था। इस पूरी कार्रवाई को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी, नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा और सहायक आबकारी आयुक्त क्रिस्टोफर खलखो के कुशल मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया। जमीनी स्तर पर साइबर सेल प्रभारी विजय चेलक, कोतरारोड़ थाना प्रभारी शील कुमार आदित्य और आबकारी उपनिरीक्षक रागनी नायक की टीम ने बेहद सूझबूझ का परिचय दिया। इस बड़ी कामयाबी के बाद पुलिस और आबकारी विभाग ने साफ कर दिया है कि क्षेत्र में अवैध और मिलावटी शराब के खिलाफ यह अभियान अब और भी आक्रामक तरीके से जारी रहेगा।
