बीजापुर। कड़कड़ाती धूप और आसमान से बरसती आग के बीच जब घरों के नल सूखे पड़ जाएं, तो सब्र का बांध टूटना लाजमी है। कुछ ऐसा ही नजारा मंगलवार को बीजापुर में देखने को मिला, जहां पेयजल संकट से नाराज शांतिनगर वार्ड की बड़ी संख्या में महिलाएं नगर पालिका परिषद कार्यालय के भीतर धरने पर बैठ गईं। पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम सल्लूर के नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन ने शहर के भीतर गहराते जल संकट और प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है। आक्रोशित महिलाओं का कहना था कि पिछले पांच दिनों से पूरे इलाके में नियमित जलापूर्ति ठप पड़ी है, जिससे दैनिक काम-काज पूरी तरह ठप हो गए हैं। लगातार शिकायतें करने के बावजूद जब प्रशासन की नींद नहीं टूटी, तो मजबूरन महिलाओं को आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा।
प्रदर्शन का समर्थन करते हुए पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम सल्लूर ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पानी जैसी बुनियादी और अनिवार्य सुविधा के लिए भी अगर जनता को सड़कों पर उतरना पड़े, तो यह बेहद गंभीर विषय है। नगर पालिका को राजनीति और सुस्ती से ऊपर उठकर इस दिशा में तुरंत कोई ठोस कदम उठाना चाहिए, क्योंकि पानी का अधिकार हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।
दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर नगर पालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) बंसीलाल नूरेटी ने प्रशासनिक पक्ष रखते हुए स्थिति को जल्द संभालने का दावा किया। उन्होंने बताया कि जल संकट की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित शांतिनगर क्षेत्र में रोजाना करीब 35 टैंकरों के माध्यम से पानी भिजवाया जा रहा है। सीएमओ के मुताबिक, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में अचानक आई तकनीकी खराबी के कारण मुख्य पाइपलाइनों में पानी की सप्लाई बाधित हुई है। उन्होंने राहत की बात कहते हुए आश्वासन दिया कि तकनीकी अमला लगातार मरम्मत के काम में जुटा हुआ है और आज शाम तक खराबी को पूरी तरह दूर कर प्रभावित इलाकों में नियमित जलापूर्ति बहाल कर दी जाएगी।
