रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में छत्तीसगढ़ के विकास को नई रफ्तार देने वाले कई ऐतिहासिक फैसलों पर मुहर लगी। राज्य की आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने, कृषि में सुधार लाने, ऊर्जा क्षेत्र को आधुनिक बनाने और शहरी परिवहन को पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में साय सरकार ने चौतरफा रणनीति अपनाई है। इस बैठक का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला फैसला छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड को लेकर रहा, जिसे अब आईपीओ (इलेक्ट्रॉनिक इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) के माध्यम से शेयर बाजार (स्टॉक एक्सचेंज) में सूचीबद्ध करने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है। इस दूरगामी कदम से न केवल पावर कंपनी के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ के आम निवेशकों को भी सरकारी कंपनी में सीधे तौर पर भागीदारी करने का एक सुनहरा अवसर मिलेगा। सरकार ने इस पूरी वित्तीय प्रक्रिया को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए कंपनी के संचालक मंडल को पूरी तरह अधिकृत कर दिया है।
ऊर्जा क्षेत्र के साथ-साथ सरकार ने अन्नदाताओं की खुशहाली और पर्यावरण संतुलन के लिए “कृषक उन्नति योजना” को एक बेहद क्रांतिकारी और नए कलेवर में पेश किया है। खरीफ 2026 से लागू होने वाले इस नए स्वरूप के तहत सरकार फसल विविधीकरण (क्रॉप डायवर्सिफिकेशन) पर सीधा ध्यान केंद्रित कर रही है। अब जो किसान पारंपरिक धान की खेती छोड़कर दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो-कुटकी, रागी और कपास जैसी वैकल्पिक फसलों को अपनाएंगे, उन्हें सरकार की तरफ से प्रति एकड़ 15,000 रुपये की बड़ी आदान सहायता (इनपुट सब्सिडी) दी जाएगी। इस नीति के पीछे सरकार का त्रिकोणीय उद्देश्य है किसानों की आय में भारी वृद्धि करना, मिट्टी की सेहत सुधारना और लगातार गिरते भूजल स्तर का संरक्षण करना। इसके साथ ही गरीब परिवारों के पोषण की चिंता करते हुए कैबिनेट ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी मुफ्त या रियायती चना वितरण योजना को जारी रखने का संवेदनशील निर्णय लिया है। राशन की दुकानों तक चने की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे, इसके लिए राज्य नागरिक आपूर्ति निगम को नेकडेक्स-ई-मार्केट (NEML) ई-ऑक्शन के जरिए पारदर्शी और कम लागत पर चना खरीदने की विशेष अनुमति दी गई है, साथ ही अप्रैल से जून 2026 तक की अवधि के विस्तार को भी हरी झंडी दे दी गई है।
प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा ढांचागत सुधार करते हुए कैबिनेट ने ‘योग’ विषय को अब समाज कल्याण विभाग के दायरे से बाहर निकालकर सीधे चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन सौंप दिया है। चूंकि योग प्राचीन आयुष चिकित्सा प्रणाली का एक अटूट हिस्सा है और राष्ट्रीय स्तर पर भी योग शिक्षा, अनुसंधान एवं इससे जुड़ी तमाम गतिविधियां आयुष तंत्र के माध्यम से ही संचालित होती हैं, इसलिए प्रशासनिक तालमेल को बेहतर करने के लिए यह बदलाव किया गया है। अब प्रदेश में योग से जुड़ी पढ़ाई, ट्रेनिंग और रिसर्च के कामों को ज्यादा वैज्ञानिक और प्रभावी ढंग से चलाया जा सकेगा। इसके अलावा, आम जनता को प्रदूषण मुक्त और आधुनिक सफर का तोहफा देने के लिए प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत पेमेंट सिक्योरिटी मैकेनिज्म (PSM) के अंतर्गत डायरेक्ट डेबिट मैंडेट की सहमति केंद्र सरकार को भेजने की अनुमति दे दी गई है। इस तकनीकी हरी झंडी के बाद रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर और कोरबा जैसे प्रमुख शहरों की सड़कों पर कुल 240 शानदार इलेक्ट्रिक बसें दौड़ने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है, जिससे शहरी प्रदूषण घटेगा और लोगों को बेहद किफायती तथा सुरक्षित सफर मिलेगा।
कैबिनेट ने बुनियादी ढांचे और राजस्व सुरक्षा को लेकर भी दो बेहद अहम फैसले किए हैं। नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण को जमीनों की खरीद पर मिलने वाली स्टाम्प ड्यूटी (Stamp Duty) छूट की मियाद को बढ़ाकर 31 मार्च 2028 तक कर दिया गया है, जिससे इस आधुनिक शहर के विकास कार्यों में कोई वित्तीय रुकावट न आए। वहीं दूसरी तरफ, राज्य में हो रहे अवैध उत्खनन पर पूरी तरह लगाम लगाने और सरकारी खजाने को मजबूत करने के लिए ‘छत्तीसगढ़ खनिज (खनन, परिवहन एवं भंडारण) नियम, 2009’ में कड़ा संशोधन किया गया है। अब राज्य में खनिजों का परिवहन करने वाले सभी वाहनों में आरएफआईडी (RFID) टैग और आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम लगाना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। डिजिटल तकनीक के इस इस्तेमाल से न केवल खनिजों की सटीक मात्रा और उनकी गुणवत्ता की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग होगी, बल्कि खनिज माफियाओं के अवैध कारोबार पर भी पूरी तरह से ताला लग जाएगा।
