रायपुर। छत्तीसगढ़ में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन और भंडारण करने वालों के खिलाफ खनिज विभाग ने अपनी कार्रवाई चौगुनी तेज कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कड़े निर्देशों और शासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत राज्य के अलग-अलग जिलों में ताबड़तोड़ छापेमारी की गई है। इस पूरी संयुक्त कार्रवाई के बाद से सरगुजा संभाग से लेकर राजनांदगांव, बालोद और बलरामपुर तक के अवैध कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है। शासन का स्पष्ट उद्देश्य प्रदेश के मूल्यवान प्राकृतिक और खनिज संसाधनों को सुरक्षित रखना तथा इस अवैध धंधे में शामिल लोगों पर कानूनी शिकंजा कसना है।
इस पूरे अभियान के दौरान विशेष रूप से सरगुजा जिले में मिल रही लगातार जन-शिकायतों के बाद खनिज विभाग की टीम ने बड़ी मुस्तैदी दिखाई। विभाग ने विभिन्न संवेदनशील इलाकों में आकस्मिक दबिश देकर अवैध रूप से मिट्टी, मुरूम, रेत और गिट्टी का उत्खनन व परिवहन करते हुए छह वाहनों को रंगे हाथों पकड़ा। जब्त किए गए इन वाहनों में जेसीबी, ट्रैक्टर और टिपर शामिल हैं। सरगुजा में हुई इस कार्रवाई की सबसे बड़ी बात यह है कि अब दोषियों पर संशोधित छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 के नए और बेहद कड़े प्रावधानों के तहत गाज गिरेगी। नए नियमों के अनुसार, अब पकड़े जाने पर शमन शुल्क न्यूनतम 25 हजार रुपये या 2 हजार रुपये प्रति टन (जो भी अधिक हो) के हिसाब से वसूला जाएगा, और इसके साथ ही खनिज का पूरा बाजार मूल्य भी जुर्माने के तौर पर देना होगा।
सरगुजा के अलावा राज्य के अन्य हिस्सों में भी विभाग का डंडा पूरी ताकत से चला है। राजनांदगांव जिले में चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के भीतर अब तक रिकॉर्ड 52 मामलों पर कार्रवाई की जा चुकी है, जिसमें अवैध रेत उत्खनन, परिवहन और भंडारण से कुल 18 लाख 95 हजार 600 रुपये का अर्थदंड वसूला गया है। वहीं बालोद जिले के कसही गांव में बिना किसी वैध दस्तावेज के पत्थर निकालते पाए जाने पर एक विशाल चैन माउंटेन मशीन को मौके पर ही सील कर दिया गया। इसी कड़ी में बलरामपुर जिले के राजपुर क्षेत्र में रेत का अवैध परिवहन कर रहा एक टिपर पकड़ा गया, जबकि बसंतपुर में संचालित एक फ्लाई ऐश ब्रिक्स यूनिट पर छापा मारकर वहां बिना अनुमति के स्टॉक करके रखी गई 90 घनमीटर रेत को जब्त कर संचालक को कारण बताओ नोटिस थमाया गया है।
