गरियाबंद। छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के बाद विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूबे में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, लेकिन विडंबना देखिए कि खुद भाजपा के ही एक कद्दावर युवा नेता को अपने गांव की बदहाली दूर कराने के लिए सड़क पर उतरकर चक्काजाम करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। यह हैरान करने वाला मामला गरियाबंद जिले के देवभोग थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिला अध्यक्ष हेमंत नागेश ने सैकड़ों ग्रामीणों के साथ मिलकर नेशनल हाईवे 130-सी पर तंबू तान दिया और चक्काजाम कर दिया। अपनी ही सरकार के कार्यकाल में एक सत्ताधारी नेता का इस तरह सड़क पर बैठना इलाके में जबरदस्त चर्चा का विषय बन गया है।
पूरा मामला मुड़ागांव के आश्रित पारा ‘करलाकोट’ का है। यह गांव किसी और का नहीं, बल्कि खुद भाजयुमो जिला अध्यक्ष हेमंत नागेश का गृह ग्राम है। पिछले दो सालों से यहां के ग्रामीण एक अदद सीसी सड़क (कंक्रीट सड़क) के लिए तरस रहे हैं। बारिश के दिन शुरू होते ही पूरा गांव दलदल और कीचड़ में तब्दील हो जाता है। आलम यह है कि किसी मेडिकल इमरजेंसी के वक्त गांव में एंबुलेंस या कोई दूसरा वाहन तक नहीं घुस पाता। स्कूली बच्चों को हर दिन इसी कीचड़ से सराबोर होकर स्कूल जाना पड़ता है। अपनी ही सरकार में जब प्रशासनिक अधिकारियों ने इस बुनियादी समस्या पर आंखें मूंद लीं, तो भाजपा नेता हेमंत नागेश का धैर्य जवाब दे गया। उन्होंने सैकड़ों महिला और पुरुष ग्रामीणों के साथ मिलकर हाइवे ठप कर दिया। आंदोलन के दौरान नागेश ने प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जितनी तत्परता और ताकत पुलिस ने हमें हाइवे से खदेड़ने में दिखाई, अगर उसकी आधी तत्परता भी हमारी सड़क बनाने में दिखाई होती, तो आज सत्ताधारी दल के नेता को सड़क पर बैठने की नौबत ही नहीं आती।
इधर, भाजपा सरकार के राज में भाजपा नेता को ही आंदोलन करते देख विपक्षी दल कांग्रेस को एक बड़ा सियासी मुद्दा मिल गया। मौके की नजाकत को भांपते हुए कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सुखचंद बेसरा तुरंत ग्रामीणों को हमदर्दी दिखाने और गांव का जायजा लेने पहुंच गए। हालांकि, उनके पहुंचने से पहले ही भारी संख्या में तैनात पुलिस बल ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों को हाईवे से खदेड़कर रास्ता बहाल करा दिया था। लेकिन कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने इस स्थिति पर करारा तंज कसने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बेसरा ने भाजपा सरकार के विकास के दावों को पूरी तरह ढोंग और खोखला बताते हुए कहा कि जो सरकार अपने ही संगठन के जिला अध्यक्ष के गांव को दुरुस्त नहीं कर पा रही है, जो अपने नेताओं को बुनियादी सुविधाएं नहीं दे पा रही, वह आम जनता का क्या भला करेगी? उन्होंने साफ कहा कि जब सत्तासीन दल के लोगों को ही विकास कार्यों के लिए धरने पर बैठना पड़ रहा है, तो समझा जा सकता है कि प्रदेश में विकास की असल हकीकत क्या है।
इस पूरे सियासी ड्रामे और हंगामे के बीच मौके पर पहुंचे तहसीलदार अजय चंद्रवंशी ने बताया कि हाईवे से प्रदर्शनकारियों को हटाकर यातायात पूरी तरह बहाल कर दिया गया है। ग्रामीणों और भाजयुमो अध्यक्ष से मांग पत्र ले लिया गया है, जिसे उच्च कार्यालय के माध्यम से शासन-प्रशासन तक भेजा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि अपने ही नेता के इस बगावती और मजबूरी भरे आंदोलन के बाद क्या भाजपा सरकार जागती है, या करलाकोट के ग्रामीण इस बारिश में भी कीचड़ में ही सने रहने को मजबूर होंगे।
