बलरामपुर..(कृष्णमोहन कुमार)..पीडीएस के चावल को भिगाने का मामला अभी शांत हुआ ही नहीं था..की एक बार फिर पीडीएस चावल में कंकड़ पत्थर मिलने का मामला सामने आ गया है..जिसके बाद उचित मूल्य पर राशन लेने गये ग्रामीणों ने राशन नहीं लेने का मन बना लिया है..वही इस मामले की जानकारी मिलते ही जिला पंचायत उपाध्यक्ष धीरज सिंह देव मौके पर पहुंचे और खाद्य मंत्री दयालदास बघेल से दूरभाष पर चर्चा कर पूरे मामले की जानकारी दे दी है..खाद्य मंत्री ने भी मामले में कार्यवाही का आश्वासन दिया है!. इधर खाद्य विभाग के अधिकारियों ने भी राशन दुकान पहुंचकर सरकारी चावल का अवलोकन कर कंकड़-पत्थर वाले चावल को वापस करने की बात कही है..
बता दे कि बलरामपुर ब्लॉक के खड़ियाडामर गांव के शासकीय उचित मूल्य दुकान में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के 502 हितग्राहियों को वितरित की जाने वाली खाद्यान्न सामग्री चावल में कंकड़ पत्थर पाया गया है..यह चांवल दीप राइस मिल बलरामपुर से ही सप्लाई की गई थी..जिसके बाद अब सवाल यह उठ रहे है..की क्या गरीबों को दी जाने वाली चावल की गुणवत्ता बगैर जांच किये राशन दुकानों में भेज दी जाती है?.वैसे नागरिक आपूर्ति निगम सार्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन सामग्रियों की गुणवत्ता जांचने कर्मचारियों की नियुक्ति होती है..और यह संभव है की गुणवत्ता जांचने वाले की मेहरबानी से राइस मिल से चांवल सीधे राशन दुकान की दहलीज पर पहुँचा है।
दरअसल, जिस पीडीएस के चावल को लेकर देश में छत्तीसगढ़ की पहचान बनी..और तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह को चाउर वाले बाबा के नाम से प्रसिद्धि मिली..उसी छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार में कंकड़ पत्थर वाला चावल मिलने से साय सरकार की साख दांव पर लग गई है..ग्रामीणों का कहना है की शासन और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही से उन्हें आज यह दिन देखना पड़ रहा है!.
बहरहाल, सुशासन की सरकार में सेवा से संकल्प का दावा किया जा रहा है..और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जीरों टार्लेन्स की बात कहते नहीं थकते है..अब भला उनके राज्य छत्तीसगढ़ में बगैर कमीशनखोरी के यह संभव कैसे हो सकता है की..गरीबों को रियायती दर पर दी जाने वाली अनाज के प्रत्येक बोरे से लगभग दो से ढाई किलो कंकड़ पत्थर मिल रहे हो?.
