धमतरी। सरकार की ‘हर घर जल योजना’ के बड़े-बड़े दावों की हवा कुरुद विकासखंड के ग्राम मौरी और बकली में निकल चुकी है। भीषण गर्मी की दस्तक के साथ ही इन दोनों गांवों में पेयजल संकट इस कदर गहरा गया है कि नल-जल योजनाएं दम तोड़ चुकी हैं और हैंडपंपों ने भी जवाब दे दिया है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) की कथित लापरवाही के चलते हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं और ग्रामीण हर दिन पानी के लिए कड़ा संघर्ष करने को मजबूर हैं।
ग्राम मौरी में तो आधी बस्ती पूरी तरह जल संकट की चपेट में है, जहाँ महिलाओं को रोज सुबह चार बजे उठकर पानी की तलाश में भटकना पड़ता है। घंटों कतार में खड़े रहने के बाद भी कई बार उन्हें खाली बर्तन लेकर लौटना पड़ रहा है। प्रदीप ध्रुव, धुनीराम यादव और महिपाल यादव सहित अनेक ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग को कई बार लिखित शिकायत दी गई, लेकिन आज तक कोई अधिकारी सुध लेने नहीं पहुँचा। कमोबेश यही स्थिति ग्राम बकली की भी है, जहाँ पानी की आपूर्ति पूरी तरह ‘भगवान भरोसे’ है। होली से पहले तक यहाँ सिर्फ 10 फीसदी घरों में पानी पहुँच रहा था, जो नहर में पानी आने के बाद बढ़कर महज 25 फीसदी ही हो पाया है। यानी आज भी गांव की 75 प्रतिशत आबादी इस तपती गर्मी में प्यासी रहने को मजबूर है।
बकली के शिव कुमार साहू, बाल गोविंद साहू और आनंद राम साहू ने बताया कि गांव में बनी पानी टंकी को सात साल बीत चुके हैं, जो अब बढ़ती आबादी के लिहाज से बेहद छोटी पड़ रही है। ग्रामीणों की मांग है कि यहाँ एक नई पानी टंकी का निर्माण कराया जाए। इसके अलावा, तकनीकी खराबियों को दूर करने के लिए पीएचई के मैकेनिक समय पर नहीं पहुँचते, जिससे छोटी समस्याएं भी हफ्तों तक खिंच जाती हैं। संकट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गांव के सार्वजनिक शौचालयों में पानी न होने के कारण लोगों को तालाब से पानी ढोना पड़ रहा है, जिससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा पैदा हो गया है।
प्रेमलाल साहू सहित आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि कलेक्टर और पीएचई विभाग ने तत्काल टैंकरों की व्यवस्था नहीं की और बंद पड़ी योजनाओं को नहीं सुधारा, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। दूसरी ओर, एसडीओ राजवीर महोबिया का कहना है कि समस्या के समाधान के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है और छह तकनीशियनों की टीम लगातार हैंडपंपों और तकनीकी खराबियों को सुधारने के काम में जुटी हुई है।
