बलरामपुर..(कृष्णमोहन कुमार)..झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से 3 वर्षीय बालक की मौत का मामला सामने आया है..और इस मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच में जुटी हुई है.. बता दे की जिले में झोलाछाप डॉक्टरों के अवैध क्लिनिक संचालित किये जाने का मामला सामने आते रहा है..लेकिन प्रशासन की खानापूर्ति कार्यवाही के चलते झोलाछाप डॉक्टरों का हौसला बुलंद है..और जानकारी के अभाव में ग्रामीण इन झोलाछाप डॉक्टरों के चंगुल में फंसते रहे है..वही पिछले साल भी एक झोलाछाप डॉक्टर से गलत इलाज के चलते एक मासूम की मौत हुई थी..बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग ग्रामीणों में जागरूकता के लिये कोई खास पहल करता नजर नहीं आ रहा है!.
बलरामपुर थाना क्षेत्र के जमुआटांड का निवासी रमेश चेरवा अपने तीन वर्षीय पुत्र को बुखार आने पर सारनाडीह निवासी झोलाछाप डॉक्टर के अवैध क्लिनिक में ले गया था..जिसके बाद झोलाछाप डॉक्टर ने बच्चे को एक इंजेक्शन लगाया ..और इंजेक्शन लगते ही मासूम की तबियत बिगड़ने लगी थी..परिजन मासूम को घर ले गये ,और अचेत अवस्था में उसे जिलाअस्पताल लाया गया..जहां डाक्टरों ने मासूम को मृत घोषित कर दिया!.इधर सबसे अहम बात यह है की बार – बार झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज के फेर में हो रही मासूमो की मौत पर स्वास्थ्य विभाग मूक दर्शक बना हुआ है!.
बीएमओ ने कहा आप सूचना दे दीजिए..
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बलरामपुर बीएमओ से संपर्क करने का प्रयास गया किया ..और दूरभाष के माध्यम से संपर्क भी हुआ..लेकिन उनका कहना था..की आप मुझे सूचना दे दीजिए मैं दिखवा लेता हूं!..अब यह सोचने वाली बात है की बीएमओ साहब के ब्लॉक में झोलाछाप डॉक्टर के प्रकोप से एक मासूम की जान चली गई..पुलिस ने मर्ग भी कायम कर लिया है..ऐसे में उन्हें कैसे नहीं पता?.
जिला मुख्यालय में स्वास्थ्य विभाग का यह हाल है..तो जिले के दूरस्थ अंचलों का हाल भगवान भरोसे है..स्वास्थ्य विभाग अपने मैदानी अमले यानि मितानिनों बलबूते सबकुछ ठीक होने का हवाला देते थकता नहीं है..इधर हालात तो कुछ उलट ही नजर आते है..अगर ईमानदारी से गांव की मितानिने अपना थोड़ा समय निकालकर गांव में संपर्क बढ़ाए और लोगों को अस्पताल जाने जागरूक करे तो झोलाछाप डॉक्टरों की दुकान बंद हो सकती है..लेकिन किसी को क्या पड़ी है..सब भगवान के भरोसे है!.बहरहाल इस मामले में जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए..और ऐसी घटनाएं ना हो इसकी रोकथाम की रणनीति बनाई जानी चाहिए!.
