जांजगीर चांपा। प्रदेश में शिक्षा के स्तर को लेकर किए गए आकलन ने जांजगीर-चांपा जिले की पोल खोलकर रख दी है। कभी शैक्षणिक रूप से पहचान रखने वाला यह जिला अब प्रदेश में 32वें स्थान पर खिसक चुका है। यह गिरावट केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग की लापरवाही और विफल नीतियों पर लगा बड़ा दाग है।
जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, समय पर पढ़ाई न होना, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और कमजोर शैक्षणिक निगरानी ने शिक्षा व्यवस्था को खोखला कर दिया है। हालात यह हैं कि कई स्कूलों में बच्चे कक्षा के अनुसार पढ़-लिख तक नहीं पा रहे, लेकिन विभागीय अधिकारी फाइलों में सब कुछ संतोषजनक दिखा रहे हैं।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि बार-बार शिकायतों और रिपोर्ट के बावजूद शिक्षा विभाग में सुधार की कोई ठोस पहल नहीं दिख रही। निरीक्षण सिर्फ कागजों तक सीमित हैं और जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेही से बचते नजर आ रहे हैं।
शिक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि जिला प्रदेश में फिसड्डी साबित हो रहा है, तो इसका सीधा अर्थ है कि सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है। अब सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग इस गिरावट की जिम्मेदारी लेगा, या फिर आने वाली पीढ़ी को भी इसी बदहाल व्यवस्था के हवाले कर दिया जाएगा।
