ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर से खाकी का एक ऐसा अनोखा और संवेदनशील चेहरा सामने आया है, जिसकी चर्चा हर जुबान पर है। अमूमन खूंखार अपराधियों और गैंगस्टरों के पीछे भागने वाली पुलिस इस बार एक बेहद खास और पवित्र मिशन पर निकली है। मिशन है.. भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप ‘लड्डू गोपाल’ को खोजना। इस अनोखे मामले की गंभीरता को देखते हुए बाकायदा एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जिसमें तीन थानों की पुलिस को तैनात किया गया है।
यह पूरी कहानी श्रद्धा, भावना और आस्था से जुड़ी है। ग्वालियर के अलकापुरी की रहने वाली विजया शर्मा के लिए यह केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि उनके जीवन का सबसे अहम हिस्सा है। दरअसल, करीब 20 साल पहले विजया को लड्डू गोपाल की यह छोटी सी प्रतिमा मिली थी, जिसे वह बचपन से ही अपना भाई मानती आ रही हैं। पांच साल पहले उनकी मां के निधन के बाद यह मूर्ति उनके लिए मां की आखिरी और सबसे अनमोल निशानी बन गई थी। लेकिन बीती 29 जनवरी को जब विजया अपनी बहन के साथ माधौगंज बाजार में खरीदारी करने गईं, तो भीड़भाड़ के बीच उनकी आस्था का यह केंद्र कहीं खो गया।
इस घटना के बाद से विजया का रो-रोकर बुरा हाल है और वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हैं। उन्होंने अपने स्तर पर पांच महीनों तक माधौगंज, जनकगंज और कोतवाली के बाजारों की खाक छानी, लेकिन जब कान्हा का कोई सुराग नहीं मिला, तो उन्होंने पुलिस की शरण ली। शुरुआत में स्थानीय थानों ने थोड़ी-बहुत पूछताछ के बाद हाथ खड़े कर दिए थे, लेकिन विजया ने हार नहीं मानी। वह न्याय और अपने ‘भाई’ की आस में लगातार जनसुनवाई के चक्कर काटती रहीं और आखिरकार ग्वालियर संभाग के आईजी (IG) अरविंद सक्सेना के सामने जा पहुंचीं।
महिला की आंखों में आंसू और लड्डू गोपाल के प्रति ऐसी अटूट भक्ति देखकर आईजी का दिल भी पसीज गया। उन्होंने तुरंत मामले को संज्ञान में लेते हुए विशेष टीम गठित करने के निर्देश जारी कर दिए। सीएसपी किरण अहिरवार के नेतृत्व में बनी इस स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) में कोतवाली थाना प्रभारी के साथ-साथ जनकगंज और माधौगंज थाने के छह चुनिंदा पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया है, जो अब बाजार के सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय लोगों से पूछताछ कर रहे हैं। दूसरी ओर, विजया ने भी जनता से भावुक अपील करते हुए घोषणा की है कि जो कोई भी उनके लड्डू गोपाल को सही-सलामत लौटाएगा, उसे 5,000 रुपये का उचित इनाम दिया जाएगा। अब देखना यह है कि पुलिस की यह अनोखी तफ्तीश कब तक रंग लाती है।
