भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की सुस्ती टूटने के साथ ही मौसम की गतिविधियां एक बार फिर तेजी से सक्रिय हो गई हैं। मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटों के भीतर बुंदेलखंड के छतरपुर और पन्ना जिलों में मूसलाधार बारिश की आशंका जताते हुए ‘भारी बारिश की चेतावनी’ जारी की है। इसके साथ ही, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा और सागर संभाग सहित प्रदेश के करीब 34 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। हालांकि, राजधानी भोपाल, इंदौर और उज्जैन समेत पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में रविवार को मौसम साफ रहने और धूप-छांव की स्थिति बने रहने का अनुमान है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय राज्य के ऊपर एक साथ चार साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवाती हवाओं का घेरा) और एक प्रभावी ट्रफ लाइन सक्रिय है। इसी मौसमी सिस्टम के प्रभाव के चलते शनिवार को भोपाल और नर्मदापुरम संभाग सहित कई इलाकों में रुक-रुक कर तेज और हल्की बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग का मानना है कि हवाओं में मौजूद भारी नमी के कारण रविवार को भी आधे से अधिक मध्य प्रदेश में बादलों की आवाजाही और बूंदाबांदी का यह सिलसिला जारी रहेगा।
जहां एक तरफ रायसेन, विदिशा, नर्मदापुरम, बैतूल और चंबल संभाग के श्योपुर-मुरैना सहित विंध्य-महाकौशल के जिलों में बारिश की लुकाछिपी चलेगी, वहीं दूसरी ओर राजगढ़, सीहोर, हरदा, झाबुआ, धार और खंडवा-खरगोन जैसे पश्चिमी जिलों के निवासियों को फिलहाल भारी बारिश का इंतजार करना होगा, क्योंकि यहां मौसम मुख्य रूप से साफ रहेगा।
राहत की बात यह है कि इस मानसूनी सक्रियता से प्रदेश में बारिश की कमी की कुछ हद तक भरपाई हो सकेगी। दरअसल, जुलाई महीने में अब तक मध्य प्रदेश में मानसून का कोटा उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। पिछले नौ दिनों से राज्य के किसी भी हिस्से में तेज या अति भारी बारिश न होने के कारण कुल वर्षा का आंकड़ा सामान्य से 15 प्रतिशत पिछड़ गया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस सीजन में अब तक प्रदेश में औसतन 247 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस समय तक का सामान्य औसत 291 मिलीमीटर होना चाहिए था।
क्षेत्रवार स्थिति देखें तो पूर्वी मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन में सामान्य से 26 प्रतिशत कम पानी गिरा है, जबकि पश्चिमी हिस्से में यह कमी केवल 5 प्रतिशत की है। हालांकि, इस सूखे के बीच देवास जिला प्रदेश में ‘रेन टॉपर’ बना हुआ है, जहां सामान्य से 102 प्रतिशत अधिक यानी करीब 18 इंच बारिश हो चुकी है। इसके अलावा हरदा में 15 इंच, इंदौर-सीहोर में 14-14 इंच और राजधानी भोपाल में अब तक 13.1 इंच पानी बरस चुका है, जिससे इन इलाकों के जलाशयों में पानी की स्थिति बेहतर बनी हुई है।
