लखनऊ। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले ने अब एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मोड़ ले लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच दल (SIT) इस मामले में दूसरे दौर की पूछताछ के लिए एक बार फिर अयोध्या पहुंच चुकी है, जहां मंदिर ट्रस्ट से जुड़े बड़े नाम अब जांच के सीधे दायरे में हैं। इस बार एसआईटी के रडार पर करीब 10 लोग हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को एसआईटी ने राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा से मैराथन पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी को अनिल मिश्रा की भूमिका पर गहरा संदेह है, और जल्द ही ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी दोबारा तीखे सवाल-जवाब किए जा सकते हैं। एसआईटी मुख्य रूप से मंदिर के सेवादारों और अन्य कर्मचारियों की भर्ती में बड़े पैमाने पर हुई रिश्वतखोरी और कुंभ के दौरान नोटों के बंडल बोरों में भरकर गायब किए जाने के इनपुट्स पर काम कर रही है।
जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव की मुश्किलें लगातार बढ़ती दिख रही हैं। पुलिस गिरफ्त में आए मुख्य आरोपियों ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया है कि मंदिर में उनकी नियुक्तियां अनिल मिश्रा की सिफारिश पर ही हुई थीं। आरोपियों के कबूलनामे के बाद ये दोनों दिग्गज भी अब कानूनी शिकंजे में घिरते नजर आ रहे हैं। इस बीच, कोर्ट से 24 घंटे की पुलिस रिमांड पर लिए गए मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला से एसआईटी की पूछताछ जारी है, जबकि अन्य आरोपियों को भी जल्द रिमांड पर लेने की तैयारी है। पुलिस अब इन सभी आरोपियों की संपत्तियों का बारीक ब्योरा खंगाल रही है। जांच एजेंसी इस बात से हैरान है कि जो लोग कुछ समय पहले तक ऑटो चालक, पानी विक्रेता या डिलीवरी बॉय के रूप में बेहद सामान्य जिंदगी जी रहे थे, वे अचानक करोड़ों की संपत्तियों और आलीशान मकानों के मालिक कैसे बन गए। पुलिस इस थ्योरी पर भी काम कर रही है कि क्या यह महज छिटपुट चोरी है या फिर एक सोचे-समझे सिंडिकेट (गिरोह) के तहत चढ़ावे की रकम का आपस में सुनियोजित बंटवारा किया जा रहा था।
इसी अकूत संपत्ति की तफ्तीश में रिमांड पर लिए गए प्रतापगढ़ के नरियावां बाबूपुर निवासी अविनाश शुक्ला के रहन-सहन में आए नाटकीय बदलाव की परतें खुली हैं। एक बेहद साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाला अविनाश साल 2025 में अयोध्या आया था और उसे राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती का जिम्मा मिला था। इसके बाद से ही उसके परिवार की आर्थिक स्थिति चमत्कारी रूप से बदल गई। गांव का पुराना कच्चा मकान देखते ही देखते एक आलीशान इमारत में तब्दील हो गया, जिसका फिनिशिंग का काम अविनाश की गिरफ्तारी के ठीक बाद आनन-फानन में रोक दिया गया।
दूसरी ओर, चढ़ावा चोरी के एक अन्य आरोपी लवकुश मिश्रा के खिलाफ अब प्रशासन का कड़ा रुख देखने को मिल रहा है। अयोध्या के शहादतगंज मोहल्ले में लवकुश द्वारा अपनी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर खरीदे गए एक भूखंड पर करीब एक करोड़ रुपये की लागत से तीन मंजिला मकान का निर्माण कराया जा रहा था। इस संदिग्ध निर्माण पर संज्ञान लेते हुए अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने नियमों के उल्लंघन का हवाला देकर नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण ने भूखंड की मालकिन सुप्रिया से सात दिनों के भीतर इस आलीशान निर्माण की वैधता पर जवाब मांगा है। यदि समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो प्रशासन इस अवैध तीन मंजिला इमारत पर बुलडोजर चलाने की सख्त कार्रवाई अमल में ला सकता है।
