नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के बाद से आम जनता के मन में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम कम क्यों नहीं हो रहे हैं? इस बड़े और बेहद संवेदनशील सवाल पर केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भले ही वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें नीचे आई हैं, लेकिन देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) अभी भी उस स्टॉक को प्रोसेस कर रही हैं, जिसे पश्चिम एशिया संकट और भू-राजनीतिक तनाव के चरम समय पर काफी ऊंची कीमतों पर खरीदा गया था।
देश के सामने तेल कंपनियों का वित्तीय लेखा-जोखा रखते हुए केंद्रीय मंत्री ने एक बड़ा तथ्य उजागर किया। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान भारतीय उपभोक्ताओं को वैश्विक महंगाई की मार से सुरक्षित रखने के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचा था। इसी का परिणाम है कि 30 जून तक की अवधि में तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को नियंत्रित दरों पर बेचने के कारण कुल 74,781 करोड़ रुपये का भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ा। कंपनियों के इसी संचित घाटे और पहले से स्टॉक में मौजूद महंगे क्रूड के कारण खुदरा कीमतों में तत्काल कटौती नहीं की जा रही है।
वैश्विक संकट के इस दौर में जहां दुनिया के कई हिस्सों में ईंधन की भारी किल्लत देखी गई, वहीं भारत में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही। आंकड़ों का हवाला देते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि साल 2022 से 2026 के बीच भारत में पेट्रोल की कीमतों में सिर्फ 5.58 प्रतिशत और डीजल में 6.23 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने रेखांकित किया कि हमारे मजबूत वित्तीय तंत्र ने कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों के झटके को खुद सोख लिया और आम उपभोक्ताओं पर इसका बोझ नहीं पड़ने दिया। मार्च से जून तक के सबसे संकटग्रस्त महीनों के दौरान भी देश के किसी भी हिस्से में ईंधन की आपूर्ति प्रभावित नहीं हुई और पूरे भारत में बिना किसी व्यवधान या पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों के सुचारू रूप से तेल मिलता रहा।
भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की संभावनाओं को लेकर भी केंद्रीय मंत्री ने एक सकारात्मक संकेत दिए हैं। जब उनसे सीधे तौर पर पूछा गया कि क्या आने वाले दिनों में आम जनता को सस्ते ईंधन की राहत मिलेगी, तो उन्होंने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अगले कुछ हफ्तों तक इसी तरह निचले स्तर पर स्थिर बनी रहती हैं, तो कीमतों में कटौती पर विचार करना एक पूरी तरह से जायज और तार्किक कदम होगा। स्पष्ट है कि अगर वैश्विक बाजार का यह रुख बरकरार रहता है, तो आने वाले समय में उपभोक्ताओं को राहत मिलना तय है।
