फटाफट डेस्क। तमिलनाडु के सिनेमाई पर्दे पर दशकों तक राज करने वाले थलपति विजय ने जब राजनीति के मैदान में कदम रखा, तो उम्मीदें तो बहुत थीं, लेकिन उनके चुनावी डेब्यू ने जो धमाका किया, उसने राज्य के सियासी समीकरण ही बदल दिए। विजय की पार्टी ‘तमिझगा वेत्री कड़गम’ (TVK) की इस दमदार एंट्री के पीछे जो सबसे बड़ी ताकत रही, वो था पार्टी का लोकलुभावन और जन-केंद्रित घोषणा पत्र। विजय ने सीधे तौर पर उन वर्गों को अपनी ओर खींचा, जो चुनाव की दिशा तय करते हैं।
उन्होंने आधी आबादी यानी महिलाओं के लिए ‘मधिप्पुमिगु मगलिर थिट्टम’ के जरिए घर की मुखिया को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक सुरक्षा देने का साहसी दांव खेला, जिसे घरेलू मोर्चे पर एक बड़ी राहत माना गया। रसोई के बढ़ते बजट को संभालते हुए उन्होंने ‘अन्नपूर्णी सुपर सिक्स’ स्कीम के तहत साल में 6 एलपीजी सिलेंडर मुफ्त देने का भरोसा दिया, तो वहीं ‘अन्नन सीर थिट्टम’ के जरिए बहन-बेटियों की शादी में 8 ग्राम सोना और सिल्क की साड़ी देने का वादा कर भावनात्मक रूप से भी लोगों को जोड़ा।
विजय का विजन केवल घरेलू खर्चों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने शिक्षा और परिवहन को भी अपनी रणनीति का केंद्र बनाया। ‘कामराजर कालवी उरुथी थिट्टम’ के माध्यम से पहली से बारहवीं तक के छात्रों को सालाना 15 हजार रुपये की स्कॉलरशिप देने का वादा शिक्षा के क्षेत्र में उनकी पार्टी की गंभीरता को दर्शाता है। साथ ही, ‘वेत्री पायणम थिट्टम’ के तहत सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त सफर के वादे ने कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के बीच TVK की लोकप्रियता को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया। युवाओं और किसानों, जो किसी भी चुनाव का आधार होते हैं, उनके लिए भी विजय के तरकश में सटीक तीर थे।
उन्होंने स्नातक युवाओं को 4,000 रुपये और डिप्लोमा धारकों को 2,500 रुपये का बेरोजगारी भत्ता देने की बात कही, तो वहीं कर्ज के बोझ तले दबे किसानों के लिए 5 एकड़ तक की पूरी कर्ज माफी और उससे अधिक पर 50 प्रतिशत की छूट का ऐतिहासिक ऐलान किया। इन ठोस और सीधे लाभ पहुँचाने वाले सात वादों ने न केवल मतदाताओं के दिल में जगह बनाई, बल्कि थलपति विजय को तमिलनाडु की राजनीति में एक परिपक्व और गंभीर खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर दिया है।
