नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच दिवसीय विदेशी दौरे पर रवाना होते ही देश के राजनीतिक गलियारों में एक बड़ी हलचल शुरू हो गई है। खबर है कि विदेश दौरे से लौटने के ठीक बाद, आगामी 21 मई को प्रधानमंत्री ने अचानक मंत्रिपरिषद की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस महाबैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और सभी कैबिनेट मंत्रियों को अनिवार्य रूप से शामिल होने का निर्देश दिया गया है।
अचानक बुलाई गई इस बैठक की टाइमिंग को लेकर राजनीतिक विशेषज्ञ कई तरह के कयास लगा रहे हैं। सबसे बड़ी चर्चा यह है कि अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण पैदा हुए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) संकट और उससे भारत के सामने आने वाली आर्थिक व रणनीतिक चुनौतियों पर मंत्रियों को ब्रीफ किया जाएगा, जिसके मद्देनजर सरकार कुछ बेहद कड़े और बड़े फैसले ले सकती है।
इस रणनीतिक चुनौती के साथ-साथ सत्ता के गलियारों में एक और बड़ा मोड़ आने के संकेत मिल रहे हैं। कई विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि इस बैठक का एक बड़ा एजेंडा मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार और पुनर्गठन भी हो सकता है। जून 2024 में लगातार तीसरी बार मोदी सरकार के शपथ ग्रहण को दो साल पूरे होने जा रहे हैं।
इस समय सीमा के नजदीक आते ही कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों को जबरदस्त बल मिला है। माना जा रहा है कि इस बैठक में खाका तैयार होने के बाद, जून के दूसरे हफ्ते में आधिकारिक तौर पर मोदी मंत्रिमंडल का नया स्वरूप देश के सामने आ सकता है।
यूं तो प्रधानमंत्री मोदी शासन संबंधी प्राथमिकताओं और योजनाओं की समीक्षा के लिए नियमित रूप से मंत्रिपरिषद की बैठकें करते रहे हैं, लेकिन वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां, आगामी राज्यों के चुनाव और लगातार चल रही फेरबदल की खबरों ने इस विशेष बैठक को एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी (असाधारण) बना दिया है। इससे पहले जून 2025 में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में पीएम मोदी ने सरकार को ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की तरह चलाने का एलान किया था, जिसकी झलक बजट में भी दिखी थी।
मगर पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध ने सरकार के उस आर्थिक एजेंडे के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। अब देखना यह होगा कि 21 मई की यह बैठक देश को इस वैश्विक संकट से निकालने का क्या रास्ता ढूंढती है और मंत्रिमंडल के नए चेहरों के जरिए क्या नया राजनीतिक समीकरण साधती है।
