नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर गहराए हार्मुज संकट ने भारतीय बाजारों में महंगाई का एक नया तूफान खड़ा कर दिया है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दशक के सबसे बड़े संकटों में से एक बताया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी के कारण तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को रोजाना हो रहे 1000-1200 करोड़ रुपये के भारी नुकसान की भरपाई के लिए आखिरकार पेट्रोल और डीजल के दामों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी करनी पड़ी है। ईंधन के दामों में लगी इस आग का सीधा असर अब देश के आम नागरिकों की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखने लगा है, जिसके कारण पिछले एक हफ्ते के भीतर ही जरूरत की लगभग हर चीज आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही है।
ईंधन के मोर्चे पर आम जनता को दूसरा बड़ा झटका सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी से लगा है, जहां दिल्ली-एनसीआर में इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने सुबह छह बजे से सीएनजी के दामों में 2 रुपये प्रति किलो का इजाफा कर दिया है, जबकि इससे ठीक एक दिन पहले मुंबई में भी महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने इसी तर्ज पर कीमतें बढ़ाई थीं। परिवहन ईंधन के महंगे होते ही आम रसोई का बजट भी पूरी तरह बिगड़ गया है, क्योंकि देश की दो सबसे बड़ी डेयरी कंपनियों अमूल और मदर डेयरी ने दूध की कीमतों में 2 से 3 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही, थोक महंगाई दर (WPI) के 42 महीनों के उच्चतम स्तर 8.3 प्रतिशत पर पहुंचने से कच्चे माल, धातुओं और कपड़ों के साथ-साथ खाद्यान्न और पर्सनल केयर उत्पादों की कीमतें भी आसमान छूने लगी हैं, जिसमें अकेले साबुन और शैम्पू जैसे उत्पादों में 17.66 प्रतिशत की खुदरा बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
महंगाई की यह मार सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि खाने की थाली से लेकर निवेश के बाजारों तक इसका असर साफ देखा जा सकता है। खुदरा महंगाई दर (CPI) के 15 महीनों के शीर्ष स्तर पर पहुंचने के कारण हरी सब्जियों के दाम बेकाबू हो चुके हैं, जिसमें गोभी के दाम में 25.58 प्रतिशत और टमाटर की कीमतों में 35.28 प्रतिशत तक का भारी उछाल आया है। दूसरी ओर, सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सर्राफा बाजार में भी ऐतिहासिक तेजी देखी जा रही है, जहां सोना महज एक सप्ताह के भीतर 10,000 रुपये की छलांग लगाकर 1,62,186 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है, तो वहीं चांदी 47,000 रुपये की भारी बढ़त के साथ 3,00,238 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर को छू चुकी है। इस पूरे आर्थिक परिदृश्य में सबसे डरावना आंकड़ा ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र (Fuel and Power) से आया है, जहां थोक महंगाई दर महज 1.05 प्रतिशत से सीधे छलांग लगाकर 24.71 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो आने वाले दिनों में और अधिक आर्थिक दबाव का साफ संकेत दे रही है।
