फटाफट डेस्क। पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक बढ़त ने देश की सियासत का पूरा भूगोल बदल कर रख दिया है। निर्वाचन आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बंगाल की 294 सीटों में से भाजपा 194 पर निर्णायक बढ़त बनाए हुए है, जबकि 4 सीटों पर उसने आधिकारिक जीत दर्ज कर ली है। बंगाल के इस ‘भगवा उदय’ के साथ ही अब देश के 21 राज्यों में भाजपा समर्थित एनडीए (NDA) की सरकारें हो गई हैं, जिसने आगामी राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय कर दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले इस गठबंधन ने न केवल बंगाल में पैठ बनाई है, बल्कि असम और पुडुचेरी जैसे राज्यों में भी अपनी सत्ता बरकरार रखने में कामयाबी हासिल की है। असम में भाजपा 73 सीटों पर आगे चल रही है और 8 सीटें जीत चुकी है, जिससे यह साफ है कि वहां एक बार फिर डबल इंजन की सरकार वापसी कर रही है।
सियासी आंकड़ों के इस नए फेरबदल के बाद भाजपा अब देश के 15 राज्यों में पूर्ण रूप से अपने दम पर सरकार चलाएगी। वहीं, बिहार में जदयू, आंध्र प्रदेश में टीडीपी, नागालैंड में नागा पीपुल्स फ्रंट और मेघालय में नेशनल पीपुल्स पार्टी के साथ मिलकर गठबंधन की शक्ति 21 राज्यों तक पहुंच गई है। दूसरी ओर, विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के लिए परिणाम काफी चिंताजनक रहे हैं। तमिलनाडु जैसा मजबूत किला ढहने के बाद अब यह गठबंधन केवल 6 राज्यों तक सिमट कर रह गया है।
तमिलनाडु में सत्ता विरोधी लहर और अभिनेता विजय की पार्टी ‘तमिल वेट्री कड़गम’ (TVK) के उदय ने डीएमके-कांग्रेस गठबंधन को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। यहाँ विजय की पार्टी 106 सीटों पर आगे चल रही है, जिसने खुद को नए ‘जनायक’ के रूप में स्थापित किया है।
दक्षिण भारत की राजनीति में केरल से कांग्रेस के लिए राहत की खबर जरूर आई है, जहां वह सत्ता परिवर्तन की ओर बढ़ रही है और 37 सीटों पर बढ़त के साथ सरकार बनाने को तैयार है।
हालांकि, केरल की जीत के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की स्थिति कमजोर होती दिख रही है। अब पूरे देश में कांग्रेस केवल कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में ही अपने दम पर सरकार चला रही है। झारखंड में वह हेमंत सोरेन की जेएमएम के साथ गठबंधन की बैसाखी पर है। पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी हालांकि भाजपा विरोधी है, लेकिन वह भी औपचारिक रूप से इंडिया ब्लॉक का हिस्सा नहीं है। बंगाल की इस जीत ने न केवल भाजपा के कार्यकर्ताओं में नया उत्साह फूँक दिया है, बल्कि विपक्षी एकजुटता के दावों पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं।
