नई दिल्ली। देश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। भारतीय जनता पार्टी द्वारा अपने पत्ते खोले जाने के बाद अब मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी उच्च सदन के लिए अपने उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची जारी कर दी है। इस सूची के जरिए कांग्रेस ने न केवल अपनी चुनावी रणनीति साफ की है, बल्कि कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और झारखंड जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में अपने सबसे भरोसेमंद और संगठन के जमीनी चेहरों पर दांव खेला है। पार्टी ने अनुभवी और युवा नेतृत्व के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है, जिससे आगामी दिनों में संसद के भीतर सरकार को घेरने की रणनीति को और धार दी जा सके।
इस सूची में सबसे बड़ा और प्रमुख नाम खुद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का है, जिन्हें उम्मीद के मुताबिक कर्नाटक से प्रत्याशी बनाया गया है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का चेहरा और लंबे समय से संसदीय राजनीति का बड़ा अनुभव रखने वाले खरगे के साथ-साथ कांग्रेस ने कर्नाटक से मंसूर अली खान और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा को भी मैदान में उतारा है। पवन खेड़ा को उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने संगठन में उनके मुखर योगदान और मीडिया में पार्टी का पक्ष मजबूती से रखने का इनाम दिया है। इसके साथ ही अन्य राज्यों में भी क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की पूरी कवायद इस लिस्ट में साफ नजर आती है।

मध्य प्रदेश की बात करें तो कांग्रेस ने यहाँ अपनी सीनियर नेता और संगठन में लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभा रहीं मीनाक्षी नटराजन पर भरोसा जताया है। वहीं मरुधरा यानी राजस्थान से नीरज डांगी को प्रत्याशी घोषित कर पार्टी ने अपने पुराने चेहरों को तरजीह दी है। दक्षिण भारत के अहम राज्य तमिलनाडु से प्रवीण चक्रवर्ती को राज्यसभा भेजने की तैयारी है, जबकि आदिवासी बहुल राज्य झारखंड से प्रणव झा को उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस ने अपनी सांगठनिक रीढ़ को मजबूत करने का संदेश दिया है। इन सभी नामों को देखकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस इस बार उच्च सदन में अपनी उपस्थिति को और अधिक आक्रामक और तार्किक बनाना चाहती है।
सियासी पंडितों के मुताबिक, उम्मीदवारों का यह चयन महज एक चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीति का एक बड़ा रोडमैप है। अनुभवी और वरिष्ठ नेताओं को उच्च सदन में भेजकर कांग्रेस विधायी कार्यों में खुद को मजबूत स्थिति में देखना चाहती है। अब सभी राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की निगाहें अलग-अलग राज्यों में होने वाले दिलचस्प मुकाबलों पर टिक गई हैं। गौरतलब है कि इन खाली हो रही सीटों के लिए आगामी 18 जून को मतदान होना तय हुआ है, और इसी दिन मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद शाम को नतीजों की घोषणा भी कर दी जाएगी, जिससे राज्यसभा की नई तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।
