रायपुर। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को धरातल पर उतारने की दिशा में साय सरकार ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। राज्य में यूसीसी का खाका और कानूनी प्रारूप तैयार करने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय ने गुरुवार को एक उच्चस्तरीय समिति के गठन का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। इस बेहद महत्वपूर्ण समिति की कमान उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी गई है, जिन्हें इससे पहले उत्तराखंड में यूसीसी का सफल ड्राफ्ट तैयार करने का एक समृद्ध अनुभव हासिल है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बीते 23 जून को हुई कैबिनेट बैठक में इस उच्च-स्तरीय समिति के गठन को हरी झंडी दी गई थी, जिसके बाद अब इसे लागू करने की प्रशासनिक प्रक्रिया भी तेज हो गई है।
सरकार द्वारा गठित इस पांच सदस्यीय समिति में कानून, प्रशासन और सामाजिक मामलों के धुरंधरों को जगह दी गई है। समिति में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्यामधर सिंह और एम.के. राउत शामिल हैं, जिनमें से श्यामधर सिंह के पास प्रशासनिक कार्यप्रणाली का लंबा अनुभव है, तो वहीं एम.के. राउत नीति निर्माण और शासकीय प्रबंधन के विशेषज्ञ माने जाते हैं। इनके अलावा छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार को कानून-व्यवस्था व न्यायिक मामलों के विशेषज्ञ के रूप में और सामाजिक व कानूनी विषयों की गहरी समझ रखने वालीं ज्योति रानी सिंह को सदस्य के तौर पर इस टीम में शामिल किया गया है। यह उच्चस्तरीय टीम अब राज्य में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण (गोद लेना) जैसे संवेदनशील विषयों पर वर्तमान में चल रही कानूनी व्यवस्थाओं का बारीकी से अध्ययन करेगी।

यह समिति अपनी कार्यप्रणाली को पूरी तरह लोकतांत्रिक और समावेशी रखने वाली है। इसके तहत समिति न सिर्फ देश के अन्य राज्यों में लागू या प्रस्तावित यूसीसी व्यवस्थाओं का अध्ययन करेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ के आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों, नागरिक मंचों और विधि विशेषज्ञों से भी सीधे सुझाव और फीडबैक आमंत्रित करेगी। जनता और हितधारकों से मिलने वाले इन तमाम सुझावों का गहन विश्लेषण करने के बाद समिति समान नागरिक संहिता का एक अंतिम ड्राफ्ट तैयार कर राज्य सरकार को अपनी अनुशंसाएं सौंपेगी। इस अंतिम मसौदे को सबसे पहले राज्य कैबिनेट के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जाएगा और सभी जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद, इसे छत्तीसगढ़ विधानसभा में एक औपचारिक विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा।
