बलरामपुर..(कृष्णमोहन कुमार).. कलेक्टर के सख्त निर्देश के बाद राजस्व और स्वास्थ्य विभाग के द्वारा की जा रही ताबड़तोड़ कार्यवाही से यह तो जाहिर हो गया है..की प्रशासन के नाक नीचे झोलाछाप डॉक्टरों का धंधा कितनी तेजी से फल – फूल रहा था.. हालिया दिनों में प्रशासन की कार्यवाहीं भी काबिले तारीफ है..और उम्मीद है की इस तरह की कार्यवाही अब निरंतर देखने को मिलती रहे..सबसे बड़ा सवाल तो यह है की इन झोलाछाप डॉक्टरों के अवैध क्लिनिक पर नियंत्रण रखने विभाग में नर्सिंग एक्ट अधिकारी भी है..लेकिन उनका अबतक कोई अता पता नहीं है..कब आते है,कब जाते है..कब दर्शन होंगे जैसे तमाम तरह के सवाल है..लेकिन साहब भी मशालाह है..उनका जवाब ही नहीं!.
बात नर्सिंग एक्ट के नियमों का पालन कराने वाले अधिकारी डॉक्टर अनुज टोप्पो की हो रही है..तो वे ऐसी शख्सियत है..की उनके पास काम का वर्कलोड बहुत है…वे जिला टीकाकरण,टीबी नियंत्रण के भी अतिरिक्त दायित्वों से बंधे हुए..और बचे खुचे में बलरामपुर ब्लॉक के बीएमओ भी है..अब बीएमओ साहब के पास ही नर्सिंग एक्ट का पॉवर है..तो उन्हीं के ब्लॉक में झोलाछाप डॉक्टरों की अवैध क्लिनिको पर कार्यवाही क्यों नहीं की..छापेमारी में यह भी खुलासा हुआ है..की अवैध क्लिनिक वाले बाकायदा अपनी खुद की डिस्पेंसरी भी संचालित कर रहे थे..जहां ब्रांडेड दवाएं एक्सपायरी मिली..आखिर इतना हौसला झोलाछाप डॉक्टरों के पास आया तो आया कहां से..उतनी हिमाकत तो एमबीबीएस डॉक्टर भी नहीं कर पाते!.
स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला इतना बड़ा है ..की अधिकारी चाहे तो मिनटों में उनके पास झोलाछाप डॉक्टरों का डाटा मिल जाए..अधिकारी चाहे तो लोगो को सरकारी अस्पताल पहुंचने जागरूकता अभियान एक मुहिम की तरह चलाया जा सकता है..लेकिन क्या हो सकता है..सरकारी नौकरी है जनाब..कागज में ही खेलते रहिए..फील्ड में जाने की जरूरत ही क्या है?.और अगर पहुंच भी गये तो मामल सेट है!.
झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्यवाही पिछले साल भी इक्का दुक्का ही देखने को मिली थी..जब जिलामुख्यालय में एक 7 वर्षीय बच्चे की झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से मौत हुई थी..और अब तीन वर्षीय बच्चे के मौत के बाद देखने को मिल रही है..कही गुरुजी ही झोलाछाप डॉक्टर निकल रहे ..तो कही कम्पाउंडर तक की योग्यता नहीं रखने वाले झोलाछाप डॉक्टर है..स्वास्थ्य विभाग चाहता तो समय – समय पर कार्यवाही करता तो यह दिन देखना नहीं पड़ता..लेकिन इच्छा ही नहीं है..कुछ काम कर ले!.
बहरहाल झोलाछाप डॉक्टर अब बैकफुट पर है..कार्यवाही तेजी से हो रही है..और होनी भी चाहिए..इसके साथ ही ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी थोड़े बहुत फोकस की दरकार है!.
