बिलासपुर। पर्यावरण संरक्षण और हरित क्रांति की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में बिलासपुर के कोनी क्षेत्र में अरपा नदी के तट पर जापानी “मियावाकी तकनीक” से एक आधुनिक और सघन ‘ऑक्सीजन जोन’ विकसित किया जा रहा है। एस.ई.सी.एल. (SECL) बिलासपुर के सहयोग से संचालित इस परियोजना के तहत लगभग डेढ़ हेक्टेयर क्षेत्र में 15 हजार पौधों का रोपण किया जा रहा है, जो आने वाले समय में शहरी प्रदूषण को सोखने के लिए शहर के ‘ग्रीन फेफड़े’ के रूप में काम करेगा।
यह जापानी तकनीक वृक्षारोपण की एक वैज्ञानिक और बेहद प्रभावी पद्धति मानी जाती है, जिसे वन विकास निगम द्वारा प्रदेश में लगातार विस्तार दिया जा रहा है। इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें पौधों को बहुत कम दूरी पर बेहद व्यवस्थित ढंग से लगाया जाता है। इसके परिणामस्वरूप, पौधे सामान्य गति की तुलना में लगभग 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं। पारंपरिक वनों की तुलना में यह मियावाकी जंगल 30 गुना अधिक घना होता है और इसकी जैव विविधता भी 100 गुना ज्यादा होती है।
इस मियावाकी ऑक्सीजन जोन को तैयार करने के लिए वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके तहत भूमि में करीब एक मीटर गहरी ट्रेंच (खाई) खोदकर उसमें उपजाऊ मिट्टी डाली गई है। इसके बाद पौधों को उनकी ऊंचाई और बनावट के आधार पर हाई, मिडिल और स्मॉल कैनोपी श्रेणियों में बांटकर रोपा जा रहा है। कम से कम क्षेत्र में अधिकतम हरियाली सुनिश्चित करने के लिए सभी पौधों के बीच महज एक मीटर की दूरी रखी गई है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानती है। मियावाकी तकनीक कम भूमि में तेजी से घने जंगल तैयार करने का बेहतरीन जरिया है। इससे न केवल शहरी क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगेगी, बल्कि भूजल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय नागरिकों को स्वच्छ वातावरण मिल सकेगा।
गौरतलब है कि बिलासपुर जिले में मियावाकी तकनीक का यह पहला प्रयोग नहीं है। इससे पहले भी वन विकास निगम ने एनटीपीसी (NTPC) सीपत के सहयोग से जिले में 94 हजार पौधों का सफल मियावाकी वृक्षारोपण किया था, जो आज पूरी तरह लहलहा रहे हैं। अरपा तट पर आकार ले रहा यह नया ऑक्सीजन जोन न सिर्फ बिलासपुर की खूबसूरती में चार चांद लगाएगा, बल्कि यह छत्तीसगढ़ सरकार की दूरदर्शी सोच और पर्यावरण के प्रति उसकी मजबूत प्रतिबद्धता का एक जीवंत उदाहरण बनेगा।
