बदहाल बिजली व्यवस्था में भी बदली अपनी तकदीर

 बलरामपुर

बलरामपुर जिले के राजपुर विकासखंड अंतर्गत आने वाले धंधापुर ग्राम पंचायत के लिपलिपिडांड़ के किसान गांव के एक डेम के पानी से सिंचाई कर वे पिछले साल से मटर की खेती कर रहे हैं,लेकिन पिछले साल की सफलता को देखकर इस साल सौ एकड़ के करीब भूमि में मटर की अगेती फसल किसानों ने ली। यही वजह है कि बाजार में थोक के भाव में वे 40 रुपए किलो की दर से मटर बाजार में बेचना शुरू किया। वहीं अब भी 25 रुपए के भाव से बाजार में बिक रहा है। मटर अंबिकापुर की मंडी में बिक रहा है,वहीं खेत से मंडी तक मटर समय पर पहुंच सके, इसके लिए उन्होंने स्वयं मालवाहक भी खरीद लिया हैं,जिसमें सभी किसान मटर एक साथ बाजार लेकर पहुंचते हैं। यहां किसानों की सफलता के पीछे पढ़े लिखे युवाओं की जागरूकता भी दिखाई देती है। मटर की खेती करने वाले अधिकतर युवा किसान हैं,जिन्होंने कालेज स्तर तक की पढाई की है। गौरतलब है कि धंधापुर ही ऐसा पंचायत है जहां के किसान अंबिकापुर सब्जी मंडी में परवल सबसे पहले लेकर पहुंचते हैं और पूरे सीजन भर परवल की आवक बाजार में सबसे अधिक धंधापुर से होती है। यहां के किसान शुरूआती दौर में आठ हजार रुपए क्विंटल की दर से परवल बेचना शुरू करते हैं। किसानों का कहना है कि परवल और मटर की खेती ने ही उनकी तकदीर बदली है। अब वे दूसरों के खेत में मजदूरी करने के बजाय खुद के खेत में ही काम कर अपना भविष्य सवांर रहे हैं। वहीं सुखद बात यह है कि नौकरी पाने की लालसा छोड़ यहां के युवा खेती की ओर रूझान दिखा रहे हैं। किसानों का कहना है कि अगर कृषि विभाग व बिजली कंपनी का सहयोग मिले तो वे खेती से विकास की और तेज रफतार को छू सकते हैं लेकिन संबंधित विभागों के मैदानी अमले द्वारा साथ नहीं दिया जा रहा है। किसान जगरनाथ प्रजापति ने बताया कि मटर की खेती से बहुत फायदा है। कई किसान अब तक पचास हजार तक का मटर बेच चुके हैं। मैंने भी चार एकड़ में मटर की खेती किया है। बिजली लाइन का विस्तार होता तो और भी रकबे में मटर के बाद तरबूज और खीरा की खेती करते। किसान इमिल ने बताया कि मेरे पास छोटा हाथी मटर ढोने के लिए है। मैं ही सभी किसानों का मटर लेकर मंडी जाता हूं। यहां किसानों ने सौ एकड़ से अधिक में मटर लगाया है। सीजन खत्म होते तक हर किसान लखपति बन जाएगा।

सात साल बाद भी नहीं मिली बिजली,यहां के कुछ किसानों ने बताया कि वे वर्ष 2008 में बिजली के खंभे लगाने के लिए 17 सौ रुपए का डिमांड पटाए थे लेकिन कई चक्कर लगाने के बाद भी बिजली नहीं पहुंच सकी। ऐसी स्थिति के कारण वे जनरेटर व मिट्टी के पंप से सिंचाई करने के लिए मजबूर हैं। लिपलिपिडांड में मटर की खेती करने वाले किसानों ने कलेक्टर से मांग की है कि वहां सिचाई के लिए बिजली लाईन का विस्तार किया जाए,ताकि और बेहतर तरीके से अधिक रकबे में खेती की जा सके।

सीजीवाईडी एंड वेलफेयर सोसायटी ने किया प्रोत्साहित, मटर की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने वाले छत्तीसगढ यूथ डेवलपमेंट एंड वेलफेयर सोसायटी के सचिव दिलीप जायसवाल कहते हैं कि वे कॉर्पोरेट कंपनी की नौकरी छोड़कर गांव में आ गए और खुद भी खेती कर गांव के युवाओं को नकदी व सब्जी खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। हालांकि उनका कहना है कि मंडी में एजेंट किसानो ंने कमीशन में एक बडी राशि ले लेते हैं। इससे छुटकारा दिलाने के लिए स्थानीय प्रशासन को सख्ती दिखाने की जरूरत है, ताकि किसानों का मंडी में शोषण न हो सके।