अम्बिकापुर..(सीतापुर/अनिल उपाध्याय)..अपनी विवादित कार्यप्रणाली को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाली सीतापुर नगर पंचायत एक बार फिर नए विवाद के केंद्र में है। इस बार मामला नगर पंचायत द्वारा आयोजित दुकानों की नीलामी प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लग रहे हैं। स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता को ताक पर रखकर रसूखदारों और अपने चहेतों को गुपचुप तरीके से लाभ पहुँचाया गया है। अब इस मामले की सच्चाई उजागर करने के लिए उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।
ज्ञात हो कि लगभग दो माह पूर्व वार्ड क्रमांक-10 में नगर पंचायत द्वारा निर्माण कार्य से पहले ही 35 दुकानों की नीलामी आयोजित की गई थी। इस प्रक्रिया में शामिल होने के लिए 50 हजार रुपये की धरोहर राशि और एक हजार रुपये का फॉर्म शुल्क अनिवार्य किया गया था। चूंकि संबंधित क्षेत्र में प्रत्येक बुधवार को साप्ताहिक बाजार लगता है, इसलिए व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इन दुकानों के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साह दिखाया था। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि नीलामी के दौरान नगर पंचायत परिसर में ही खुलेआम सांठगांठ का खेल चला।
आरोप है कि मध्यस्थों के जरिए मोटी रकम लेकर मनपसंद दुकानें पहले ही बुक कर ली गईं। इसी खींचतान के कारण जो नीलामी एक दिन में संपन्न होनी थी, उसे पूरा करने में दो दिन लग गए। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मूकदर्शक बने रहे, जिससे उनकी भूमिका पर भी संदेह की उंगली उठ रही है।
धांधली की शिकायतों में यह भी बात सामने आई है कि कई रसूखदारों ने बिना अमानत राशि जमा किए और बिना फॉर्म भरे ही बोली में हिस्सा लिया, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।
इस कथित भ्रष्टाचार की परतें खोलने के लिए पूर्व पार्षद और भाजपा नेता रूपेश गुप्ता ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी है। हालांकि, उनका आरोप है कि नगर पंचायत प्रशासन जानकारी देने में आनाकानी कर रहा है ताकि गड़बड़ियों को छिपाया जा सके। नगरवासियों का स्पष्ट कहना है कि यदि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जाए, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
दूसरी ओर, इन आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए सीएमओ ओमप्रकाश शर्मा ने कहा कि नीलामी पूरी तरह से एक खुली और पारदर्शी प्रक्रिया थी, जिसमें सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद ही लोगों ने हिस्सा लिया है। आरटीआई के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर नियमानुसार जानकारी उपलब्ध करा दी जाएगी।
