जांजगीर-चांपा। 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के उद्घाटन एवं समापन समारोह के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी निमंत्रण पत्र ने अब प्रोटोकॉल को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। शासकीय आयोजन के निमंत्रण पत्र में सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों के नाम प्रमुखता से शामिल किए गए हैं, लेकिन जांजगीर-चांपा विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचित कांग्रेस विधायक व्यास कश्यप का नाम पूरी तरह गायब है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शासकीय कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि का नाम उसकी मौजूदगी देखकर तय होता है या उसके संवैधानिक पद और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के आधार पर? यदि विधायक कार्यक्रम के दौरान विदेश दौरे पर थे और आयोजन समिति को इसकी जानकारी पहले से थी, तो क्या इसी वजह से उनका नाम निमंत्रण पत्र से हटा दिया गया?
प्रोटोकॉल व्यवस्था को लेकर नियम को माने तो किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि की अस्थायी अनुपस्थिति से उसका पद और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व समाप्त नहीं होता। ऐसे में अनुपस्थिति की स्थिति में भी निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार नाम दर्ज किए जाने और संबंधित कार्यालय को आमंत्रण भेजे जाने की प्रक्रिया का सवाल उठता है।
विडंबना यह है कि एक ही शासकीय कार्यक्रम में सत्ता पक्ष से जुड़े कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों को निमंत्रण पत्र में स्थान दिया गया, जबकि क्षेत्र के निर्वाचित विपक्षी विधायक का नाम तक नहीं है। इससे अब प्रोटोकॉल से ज्यादा राजनीतिक पक्षपात की चर्चा शुरू हो गई है।
अब विधायक के समर्थकों का कहना है कि शिक्षा विभाग और आयोजन समिति को जवाब देना होगा कि विधायक व्यास कश्यप को आमंत्रित किया गया था या नहीं। यदि नहीं किया गया, तो किस नियम के तहत उनका नाम हटाया गया? और यदि आमंत्रण भेजा गया था, तो आधिकारिक निमंत्रण पत्र में उनका नाम क्यों नहीं है?
सरकारी कार्यक्रम में प्रोटोकॉल पद से चलता है या राजनीतिक पसंद से, इस सवाल का जवाब अब विभाग को देना होगा।
