सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में इन दिनों भीषण गर्मी का कहर तो जारी ही है, लेकिन उससे भी बड़ा कहर बिजली विभाग ढा रहा है। संभाग मुख्यालय अम्बिकापुर से लेकर सूरजपुर जिले तक में बिजली विभाग ने आम जनता की नाक में दम कर रखा है। जब इस तपती गर्मी में लोगों को सबसे ज्यादा बिजली की जरूरत है, तब विभाग ताबड़तोड़ अघोषित कटौती का खेल खेल रहा है। सूरजपुर जिला मुख्यालय के नजदीकी सरस्वतीपुर, रामनगर, रामपुर, रूनियाडीह, सोहागपुर, करंजी, खरसुरा समेत दर्जनों गांवों का हाल तो यह है कि पिछले तीन दिनों से लोग आंख-मिचौली से त्रस्त हैं।
ताज्जुब की बात यह है कि खुद को ‘काबिल’ समझने वाले विभाग के अधिकारी और कर्मचारी तीन दिन बाद भी एक अदद ‘फॉल्ट’ खोजने में नाकाम साबित हो रहे हैं। दिन के ठीक 12 बजे गुल होने वाली बत्ती रात के 12 बजे लौट रही है। जब परेशान जनता कंट्रोल रूम या जिम्मेदार अधिकारियों को फोन लगाती है, तो रटा-रटाया जवाब मिलता है “फॉल्ट खोज रहे हैं।” यह व्यवस्था है या जनता के सब्र का तमाशा? हल्की सी हवा चली नहीं या बारिश की दो बूंदें गिरी नहीं कि बिजली विभाग को कटौती का रेडीमेड बहाना मिल जाता है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि सूबे का ऊर्जा विभाग खुद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के पास है। एक तरफ पूरे प्रदेश में ‘सुशासन तिहार’ का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर गांव-गांव में उतर रहा है, तो दूसरी तरफ उन्हीं के नाक के नीचे उनका अपना विभाग पूरी तरह बेलगाम और गंदा हो चुका है। ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री का अपने ही विभाग पर कोई कंट्रोल नहीं रह गया है। सुशासन के दावों के बीच गांवों में बिजली का यह स्याह मंजर क्या मुख्यमंत्री की छवि को चमका रहा है?
हे विष्णु देव साय जी, आपके राज में यह कैसी दुर्दशा है? जब जनता इस भीषण तपन में बूंद-बूंद पसीने से तर होकर त्राहि-त्राहि कर रही है, तब आपकी सरकार और बेलगाम हो चुके अधिकारी चैन की बंशी बजा रहे हैं। इस बदइंतजामी से किसी और की नहीं, बल्कि सीधे आपकी सरकार की साख पर बट्टा लग रहा है। जनता ने आपको सत्ता का रिमोट थमाया है, तमाशा देखने के लिए नहीं। सरकार आपकी है, परेशान जनता आपकी है, इसलिए इस बेलगाम विभाग को तत्काल दुरुस्त कर समाधान निकालिए, वरना यह जन-आक्रोश सुशासन के सारे दावों को फूंकने के लिए तैयार बैठा है।
