रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब और डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार के सिंडिकेट को चारों खाने चित कर दिया है। अनवर ढेबर और सेवानिवृत्त आईएएस अनिल टुटेजा की अगुआई वाले इस रसूखदार सिंडिकेट पर शिकंजा कसते हुए जांच एजेंसियों ने 1,400 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क (अटैच) कर लिया है। इस सिंडिकेट पर शराब, कोयला, सट्टा और डीएमएफ जैसे चार बड़े घोटालों के ज़रिए करीब 4,000 करोड़ रुपये की अकूत अवैध कमाई करने का गंभीर आरोप है। हाल ही में ईडी द्वारा जारी तीन प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर्स ने इस सिंडिकेट की आर्थिक रीढ़ तोड़ दी है। सरकारी कागज़ातों में जिन संपत्तियों की कीमत महज 200 करोड़ रुपये दर्ज है, बाज़ार में उनका असली मूल्य 1,000 करोड़ से लेकर 1,400 करोड़ रुपये से भी ज़्यादा आंका जा रहा है।
इस महा-कार्रवाई की ज़द में रायपुर की सबसे पॉश कॉलोनियों में शुमार ‘ढेबर सिटी’ की बेनामी संपत्तियों से लेकर गोवा का बेहद आलीशान और मशहूर ‘होटल वेस्टिन’ तक आ गया है। ईडी के आधिकारिक दावों के मुताबिक, गोवा के इस फाइव स्टार होटल को शराब घोटाले से पैदा हुई 110 करोड़ रुपये की काली कमाई को ठिकाने लगाने के लिए खरीदा गया था। जांच की आंच सिर्फ जमीनों और होटलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सिंडिकेट से जुड़ी तीन प्रमुख सप्लायर कंपनियों ओम साई बेवरेजेस, दिशिता वेंचर्स और नेक्सजेन पावर इंजीटेक के 51 करोड़ रुपये के बैंक खाते, शेयर्स और म्यूचुअल फंड्स को भी फ्रीज कर दिया गया है। इन कंपनियों से सिंडिकेट द्वारा रसूख के दम पर 50 से 60 प्रतिशत तक का मोटा और जबरन मुनाफा वसूला जाता था।
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है कि सिंडिकेट ने अकेले शराब घोटाले के दम पर ही 2,883 करोड़ रुपये से अधिक का काला धन बटोरा था। भ्रष्टाचार के इस पूरे खेल को अंजाम देने के लिए नकली होलोग्राम वाली अवैध देसी शराब धड़ल्ले से बेची गई, डिस्टिलर्स से प्रति पेटी फिक्स कमीशन की वसूली की गई और नियमों को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से लाइसेंस बांटे गए। इस सिलसिले में ईडी ने तफ्तीश को आगे बढ़ाते हुए 1 जून 2026 को रायपुर की विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत में अपनी छठी पूरक चार्जशीट (Supplementary Chargsheet) दाखिल कर दी है। इस नई चार्जशीट में चार नए रसूखदारों व्यवसायी विजय भाटिया, टी. भुवनेश्वर राव, प्रोबीर शर्मा और निखिल चंद्राकर को नामजद किया गया है, जिसके बाद छत्तीसगढ़ के इस सबसे बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर अब 85 पहुंच चुकी है।
