सुकमा। कभी घोर नक्सलवाद के साये में जीने वाले सुकमा जिले के दरभागुड़ा गांव में रविवार की सुबह एक नई उम्मीद लेकर आई। छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप अचानक इस सुदूर इलाके के दौरे पर पहुंचे। सड़क किनारे बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों को देखकर मंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत अपना काफिला रुकवा लिया और लोगों के बीच जाकर उनसे सीधा संवाद किया। ग्रामीणों ने इस दौरान उनके सामने सड़क, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की समस्याएं रखीं, जिस पर त्वरित फैसला लेते हुए वन मंत्री ने मौके पर ही दो पुलियों और एक नए बोरवेल के निर्माण की तत्काल मंजूरी दे दी।
इस मुलाकात के दौरान वन मंत्री केदार कश्यप ने हाल ही में ग्राम सभा द्वारा पादरियों के प्रवेश और धर्मांतरण की गतिविधियों के विरोध में पारित किए गए ‘प्रवेश निषेध’ संबंधी प्रस्ताव की खुलकर तारीफ की। ग्रामीणों का हौसला बढ़ाते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि ग्रामसभा के पास संवैधानिक अधिकार हैं और इसके तहत लिए गए हर निर्णय का पूरा सम्मान होना चाहिए। उन्होंने यह भी जोर दिया कि बस्तर की संस्कृति की रक्षा और सामाजिक एकजुटता बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। मंत्री ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि गांव के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है।
इस दौरै पर मंत्री के साथ मौजूद समाजसेवी पी. विजय ने भी ग्रामीणों से लंबी चर्चा की। उन्होंने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि सामाजिक समरसता को बनाए रखने और गांव को तरक्की की राह पर ले जाने के लिए सभी को आपसी मतभेद भुलाकर एकजुटता के साथ काम करना होगा। विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए ग्रामीणों का यह साझा प्रयास बेहद जरूरी है।
दरभागुड़ा गांव का यह नजारा इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि भौगोलिक विषमताओं और उग्र नक्सली गतिविधियों के चलते यह इलाका लंबे समय तक प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की पहुंच से पूरी तरह कटा हुआ था। ऐसे दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र में सूबे के एक कैबिनेट मंत्री का खुद पहुंचना, आम जनता से जमीन पर बैठकर बात करना और ऑन-द-स्पॉट विकास कार्यों को हरी झंडी देना बस्तर के अंदरूनी इलाकों में आ रहे एक बड़े और सकारात्मक बदलाव का साफ संकेत है।
