बलरामपुर-रामानुजगंज. जिले में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है. बुधवार तड़के करीब 3 से 4 बजे के बीच, तीन हाथियों ने रामानुजगंज के वार्ड क्रमांक 1 में स्थित एक निजी फार्म हाउस पर हमला बोल दिया. ये हाथी जंगल की ओर से आए और सुरक्षा घेरे (फेंसिंग) को तोड़ते हुए भीतर दाखिल हो गए. उस वक्त पूरा इलाका सन्नाटे में था, जिसका फायदा उठाकर हाथियों ने जमकर तबाही मचाई.
यह फार्म हाउस ‘नई दुनिया’ के जिला प्रतिनिधि बैजनाथ केशरी का है, जहाँ तीन एकड़ में गेहूं की फसल तैयार खड़ी थी. कटाई के बाद फसल को थ्रेसिंग के लिए एक जगह इकट्ठा किया गया था, लेकिन मजदूरों की अनुपलब्धता के कारण काम टल गया था. हाथियों ने न केवल इस तैयार फसल को खाया, बल्कि उसे पैरों तले बुरी तरह रौंदकर मिट्टी में मिला दिया. अनुमान है कि करीब 25 से 30 क्विंटल गेहूं पूरी तरह नष्ट हो गया है. इसके अलावा, हाथियों ने वहां लगे केले के बागान को भी तहस-नहस कर दिया.
जिस वक्त हाथियों ने हमला किया, पास में ही फार्म हाउस का चौकीदार सो रहा था. हाथियों की चिंघाड़ और सामान टूटने की आवाज सुनकर उसकी नींद खुली. शोर-शराबा होने और ग्रामीणों की सजगता के चलते हाथी फेंसिंग पार कर वापस जंगल की ओर भाग निकले, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया. पीड़ित किसान ने बताया कि यह दूसरी बार है जब उन्हें इस तरह का नुकसान झेलना पड़ा है; दो साल पहले भी हाथियों ने यहाँ जौ की फसल बर्बाद की थी.
रामानुजगंज वन परिक्षेत्र की रेंजर डॉ. दिलरुबा बानो ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि वर्तमान में इलाके में 22 हाथियों का एक बड़ा दल सक्रिय है. यह दल लुर्गी पहाड़ से होते हुए रामपुर के जंगलों की ओर बढ़ रहा है. फार्म हाउस में उत्पात मचाने वाले तीन हाथी इसी दल से बिछड़कर रिहायशी इलाके तक पहुँच गए थे. फिलहाल हाथी मित्र दल और वन विभाग की टीम रात-भर गश्त कर रही है.
घटना के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुँचकर नुकसान का पंचनामा तैयार कर लिया है. अधिकारियों का कहना है कि आकलन के आधार पर जल्द ही मुआवजा राशि प्रदान की जाएगी. विभाग ने आसपास के ग्रामीणों को मुनादी के जरिए सतर्क किया है और शाम ढलने के बाद जंगल की ओर न जाने की सख्त हिदायत दी है. निगरानी टीम में वनपाल दयाशंकर सिंह और ड्राइवर ओमप्रकाश प्रजापति सहित हाथी मित्र दल के सदस्य मुस्तैदी से डटे हुए हैं.
