@संजय यादव
जांजगीर-चांपा। जिले के नवागढ़ विकासखंड के ग्राम पोंड़ी (राछा) में आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 295 करोड़ रुपये से अधिक के 341 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन कर मंच से विकास की लंबी सूची गिनाई। सड़कों से लेकर स्वास्थ्य, पेयजल से लेकर नगरीय अधोसंरचना तक, हर विभाग के लिए घोषणाएं हुईं और तालियों की गूंज भी। लेकिन इन तालियों के बीच एक कुर्सी ऐसी रही, जो खाली होकर भी पूरे कार्यक्रम में सबसे ज्यादा मौजूद महसूस की गई। कार्यक्रम के पहले अतिथियों की नाम की लिस्ट बनी। आमंत्रण कार्ड छपे जिसमें जिले के प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी का नाम अति विशिष्ठ के रूप लिखा गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री थे,तो केन्द्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे। लेकिन कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी की गैरहाजरी पूरे कार्यक्रम के दौरान चर्चा का विषय बना रहा।
जिले के प्रभारी एवं प्रदेश के वित्त मंत्री ओ पी चौधरी का कार्यक्रम में न पहुंचना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। मंच पर विकास के आंकड़े बढ़ते गए, लेकिन सवाल भी उतनी ही तेजी से तैरते रहे, क्या प्रभारी मंत्री के लिए जिला अब सिर्फ फाइलों तक सीमित है? या फिर यह अनुपस्थिति किसी बड़े सियासी संदेश का संकेत है?
यह पहला मौका नहीं जब मुख्यमंत्री के जिले के कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री नदारद रहे हों। इससे पहले भी ऐसी गैरहाजिरी देखी जा चुकी है। फर्क बस इतना रहा कि इस बार 295 करोड़ की विकास राशि के साये में जिले के प्रभारी मंत्री का गैरहाजरी ज्यादा चमक गया। जहां विकास कार्यों का भूमिपूजन हुआ, वहीं सियासी अटकलों का भी शिलान्यास हो गया।
कार्यक्रम में केंद्रीय व राज्य मंत्रियों, सांसदों और पूर्व जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी रही, लेकिन जनता की नजरें बार-बार उस खाली कुर्सी पर टिकी रहीं। जांजगीर-चांपा की राजनीति में अब सवाल यह नहीं कि कितने करोड़ के काम हुए, बल्कि यह है कि प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी की लगातार अनुपस्थिति के मायने क्या हैं जवाब शायद आने वाला समय ही देगा।
