बेमेतरा। आधुनिकता और 21वीं सदी के दावों के बीच अंधविश्वास की खूनी परछाई छत्तीसगढ़ का पीछा नहीं छोड़ रही है। हाल ही में आरंग में हुए दोहरे हत्याकांड की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि बेमेतरा जिले के भटगांव में जादू-टोने के संदेह में एक और जान ले ली गई। ग्राम बंजारपुर निवासी 60 वर्षीय बुजुर्ग बलराम पटेल (पिता माधो पटेल) को टंगिया (कुल्हाड़ी) से बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। धारदार हथियार से सिर और चेहरे पर किए गए ताबड़तोड़ वार ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि समाज के भीतर वैज्ञानिक चेतना के बजाय अफवाहों और वहम की जड़ें कितनी गहरी हैं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक यह वीभत्स वारदात 13 अक्टूबर की शाम 6:30 बजे से 14 अक्टूबर की भोर 3:00 बजे के बीच अंजाम दी गई। हमलावरों ने वारदात के लिए भटगांव स्थित श्मशान घाट के पास, नहर किनारे सुनसान भाठा को चुना। अंधेरे का फायदा उठाकर बलराम पटेल पर घात लगाकर हमला किया गया। सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आने से उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। सुबह लहूलुहान शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई।
वारदात की सूचना मृतक के ही गांव बंजारपुर के 20 वर्षीय युवक चन्दु उर्फ चन्द्रप्रकाश पटेल (पिता सुकालु पटेल) द्वारा दिए जाने पर परपोडी चौकी पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) (हत्या) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। फॉरेंसिक व तकनीकी टीम घटनास्थल से साक्ष्य एकत्रित कर रही है। हालांकि, मुख्य आरोपी अभी गिरफ्त से बाहर है और पुलिस संदिग्धों से पूछताछ कर तलाश में जुटी हुई है।
छत्तीसगढ़ में ‘टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम’ जैसे सख्त कानून लागू होने के बावजूद, ग्रामीण अंचलों में शक के आधार पर भीड़ और व्यक्तियों द्वारा हिंसक कदम उठाना कानून व्यवस्था व सामाजिक चेतना दोनों के लिए खुली चुनौती है। जब तक जमीनी स्तर पर प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ जागरूकता अभियानों का पहिया तेज नहीं घूमेगा, तब तक वहम और अंधविश्वास के नाम पर बलराम पटेल जैसे निर्दोष लोगों का लहू यूं ही बहता रहेगा।
