जगदलपुर। बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों की लंबी लड़ाई अब अपने निर्णायक मुकाम पर पहुंच चुकी है। कभी सिर्फ नक्सली हिंसा के लिए पहचाने जाने वाला बस्तर आज तेजी से शांति, स्थिरता और विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। क्षेत्र को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में जहां एक ओर सुरक्षाबल मुस्तैद हैं, वहीं दूसरी ओर अतीत की बड़ी नक्सली घटनाओं से जुड़े मामलों की न्यायिक प्रक्रिया को गति देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। बस्तर में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जुड़े संवेदनशील मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए जगदलपुर में विशेष न्यायाधीश के रूप में संगीता नवीन तिवारी की नियुक्ति की गई है।
इस विशेष अदालत की स्थापना से न केवल वर्षों से लंबित मामलों के जल्द निपटारे की उम्मीद जगी है, बल्कि इससे गवाहों, पीड़ित परिवारों और जांच एजेंसियों को भी बड़ी राहत मिलेगी। बस्तर के इतिहास में कुछ ऐसी भीषण घटनाएं दर्ज हैं जिन्होंने न सिर्फ इस बस्तर को बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इनमें वर्ष 2013 का कुख्यात झीरम घाटी हमला, दंतेवाड़ा में भाजपा विधायक भीमा मंडावी की शहादत और नारायणपुर में भाजपा नेता की हत्या जैसे कुल 12 बड़े मामले शामिल हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने थे।
इन सभी संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा की गई है, जिनके प्रकरण अब तक अलग-अलग न्यायिक व्यवस्थाओं के तहत विचाराधीन थे। विशेष न्यायाधीश की इस नई नियुक्ति के बाद अब एनआईए से जुड़े ये सभी महत्वपूर्ण मामले एक ही छत के नीचे अधिक व्यवस्थित और तेज गति से सुने जा सकेंगे। जानकारों का मानना है कि बस्तर में अब जब नक्सली हिंसा की घटनाएं लगभग खात्मे की ओर हैं, ऐसे समय में इन पुराने और बड़े मामलों का तार्किक व न्यायिक निष्पादन होना बेहद जरूरी है।
जगदलपुर में इस विशेष एनआईए कोर्ट के सक्रिय होने से बस्तर के प्रभावित परिवारों को सालों बाद जल्द न्याय मिलने की उम्मीद बंधी है। वर्तमान में करीब 12 चर्चित और बड़े प्रकरण इस कोर्ट में लंबित हैं। इस नई व्यवस्था के लागू होने से न केवल अदालती कार्यवाही की प्रक्रिया सुगम होगी, बल्कि बस्तर में कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली के प्रति आम जनता का भरोसा भी और अधिक मजबूत होगा।
