धमतरी। प्रधानमंत्री आवास योजना में बेहतरीन परफॉर्मेंस के लिए पूरे छत्तीसगढ़ में अपनी पीठ थपथपाने वाले धमतरी जिले से अब एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। जिले के जिन गरीबों के सिर पर पक्की छत का सपना सजा था, उनका वह सपना प्रशासनिक लेटलतीफी और फंड की कमी के कारण अधर में लटक गया है। स्थिति यह है कि धमतरी के 12,437 हितग्राही महीनों से अपनी अगली किश्तों का इंतजार कर रहे हैं और शासन स्तर पर कुल 37 करोड़ 46 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि अटकी हुई है।
फंड रुकने से जिले में हजारों मकानों का निर्माण कार्य ठप पड़ा है, जिससे परेशान होकर कई गरीब परिवारों ने या तो भारी ब्याज पर कर्ज ले लिया है या फिर अपने घर के जेवरात तक बेच डाले हैं। अब इन बेबस परिवारों की सूनी आंखें हर दिन सिर्फ बैंक खातों की तरफ टिकी हैं कि कब उनके हक का पैसा आएगा और उनके घर का काम दोबारा शुरू हो सकेगा।
अगर आंकड़ों के आईने में इस संकट को देखें, तो जिला पंचायत के प्रधानमंत्री आवास योजना विभाग से मिले ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जिले के 626 ऐसे हितग्राही हैं जिन्हें शुरुआत करने के लिए पहली किश्त के 40-40 हजार रुपये तक नसीब नहीं हुए हैं, जिसके लिए कुल 2 करोड़ 50 लाख रुपये की जरूरत है। वहीं, नींव खड़ी कर चुके 1,811 हितग्राही अपनी दूसरी किश्त के 55-55 हजार रुपये का इंतजार कर रहे हैं, जिसका कुल आंकड़ा 9 करोड़ 96 लाख रुपये बैठता है। सबसे बुरी हालत उन लोगों की है जिनके मकान लगभग बनकर तैयार हैं, लेकिन फिनिशिंग और छत के लिए मिलने वाली तीसरी किश्त की करीब 25 करोड़ रुपये की राशि अब तक अटकी हुई है।
कुल मिलाकर 12,437 परिवारों का हक सरकारी दफ्तरों की फाइलों में दबा हुआ है, जिससे परेशान होकर लोग रोज बैंकों के चक्कर काट रहे हैं और हर बार उन्हें खाली हाथ और मायूसी के साथ लौटना पड़ रहा है। हालांकि, इस पूरे मामले पर विभागीय अधिकारियों का दावा है कि केंद्र सरकार की ओर से राज्य को राशि आवंटित कर दी गई है और बहुत जल्द यह पैसा सीधे हितग्राहियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया जाएगा, जिसके बाद रुके हुए निर्माण कार्यों को फिर से रफ्तार मिलेगी।
