जांजगीर-चांपा। जिला मुख्यालय जांजगीर स्थित सिंचाई विभाग की पुरानी एवं नई सिंचाई कॉलोनी के शासकीय आवासों का संचालन और आवंटन अब भी जिला कार्यालय के अधीन होने का मामला सामने आया है। जिले के गठन को करीब तीन दशक होने के बावजूद इन आवासीय परिसरों को संबंधित सिंचाई विभाग को वापस नहीं सौंपे जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
बताया जाता है कि जिले के गठन के शुरुआती दौर में जिला मुख्यालय में कलेक्टर कार्यालय की आवासीय कॉलोनी उपलब्ध नहीं थी। तत्कालीन व्यवस्था के तहत विभिन्न विभागों के शासकीय आवासों को जिला प्रशासन के अधीन लेकर उनका आवंटन किया गया था। समय के साथ कई जिलों में संबंधित विभागों के आवास उन्हें वापस सौंपे गए, लेकिन जांजगीर में सिंचाई विभाग की पुरानी, नई और ब्लॉक कॉलोनी की व्यवस्था अब तक बदली नहीं गई।
इस व्यवस्था का असर सिंचाई विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों पर भी पड़ने की बात कही जा रही है। विभाग के कर्मचारियों को पात्रता के बावजूद शासकीय आवास उपलब्ध कराने में परेशानी होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। सूत्रों के अनुसार, पूर्व में सिंचाई विभाग के अधिकारियों द्वारा कॉलोनियों को विभाग के अधीन वापस किए जाने को लेकर जिला कार्यालय से पत्राचार भी किया गया था, लेकिन मामला अब तक लंबित है।
मकान आवंटन में लेनदेन के आरोप भी चर्चा में….
इधर, शासकीय आवासों के आवंटन की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, आवास आवंटन में कथित आर्थिक लेनदेन की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग उठ रही है।
लोगों का कहना है कि प्रशासन को यह सार्वजनिक करना चाहिए कि वर्तमान में कॉलोनियों का संचालन किस आदेश और नियम के तहत हो रहा है, आवास आवंटन के क्या मापदंड हैं और अब तक कितने आवास किन लोगों को आवंटित किए गए हैं।
यदि आवास आवंटन में नियमों का उल्लंघन अथवा आर्थिक लेनदेन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि व्यवस्था पूरी तरह नियमसम्मत है तो जिला प्रशासन को संबंधित आदेश और आवंटन प्रक्रिया स्पष्ट कर उठ रहे सवालों पर विराम लगाना चाहिए।
अब देखना होगा कि करीब तीन दशक पुरानी इस व्यवस्था की समीक्षा कब होती है और सिंचाई विभाग की कॉलोनियों को लेकर जिला प्रशासन क्या निर्णय लेता है।
